उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आईपीएस  नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी की केंद्रीय डेपुटेशन चुनौती पर सीएटी में जाने का दिया निर्देश, केंद्र के आदेश को ठहराया सही 

Uttarakhand High Court directs IPS Neeru Garg and Arun Mohan Joshi to approach CAT on challenge to central deputation, upholds Centre's order

नैनीताल। 

उत्तराखंड हाईकोर्ट में आईजी पद पर तैनात दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद केंद्र सरकार के आदेश को प्रथम दृष्टया सही ठहराया और याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अपनी शिकायत के निवारण के लिए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) का रुख करें।

अधिवक्ता पंकज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि सेवा संबंधी विवादों के समाधान के लिए उचित मंच केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ही है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि आईपीएस अधिकारी केंद्र सरकार के कर्मचारी होते हैं, जिन्हें विभिन्न राज्यों में सेवा के लिए भेजा जाता है। आवश्यकता पड़ने पर केंद्र सरकार उन्हें प्रतिनियुक्ति के आधार पर वापस बुला सकती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सेवा संबंधी विवादों के समाधान के लिए CAT का गठन किया गया है और सीधे हाईकोर्ट में याचिका दायर करना नियमों के अनुरूप नहीं है।
मामले के अनुसार, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में उप महानिरीक्षक (DIG) पद पर तथा वर्ष 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी अरुण मोहन जोशी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डीआईजी पद पर प्रतिनियुक्त किया गया है। इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा 5 मार्च 2026 को आदेश जारी किए गए थे, जिसके बाद उत्तराखंड सरकार ने 6 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त कर दिया।
इन्हीं आदेशों को चुनौती देते हुए अधिकारियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से यह भी पूछा कि इस रैंक के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए कितने पद निर्धारित हैं।