उत्तराखण्डः 1939 के एक्ट की अवहेलना या बड़ा खेल? बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति पर नियमों की अनदेखी का आरोप, हाईकोर्ट में दो सप्ताह बाद होगी अंतिम सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में बद्रीनाथ-केदारनाथ कमेटी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बद्रीनाथ स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर को डिमरी पंचायत को सालाना 35 हजार रुपये लीज पर देने को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को अवगत कराया गया कि लक्ष्मीनारायण मंदिर को लीज पर दिए जाने को लेकर मंदिर समिति द्वारा राज्य सरकार से कोई अनुमति नही ली गई और न ही सरकार ने कोई अनुमति दी है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 2 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बता दें कि उच्च न्यायालय में बद्रीनाथ के लक्ष्मीनारायण मंदिर को सालाना 35 हजार रूपए में किराए पर दिए जाने को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा लक्ष्मीनारायण मंदिर को नियम विरुद्ध किराए पर दे दिया गया। कमेटी के एक्ट 1939 के सेक्शन 17 के अनुसार कमेटी की कोई भी सम्पत्ति जिसकी कीमत 1 हजार से अधिक है उसे लीज पर देने से पूर्व सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर समिति द्वारा कानूनी प्रावधानों की अनदेखी करते हुए लक्ष्मीनारायण मंदिर को लीज पर दिए जाने के लिए राज्य सरकार से कोई अनुमति नही ली गई, इसमें बड़ा घोटाला हो सकता है। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है मामले की जांच कराई जाए।