उत्तराखण्डः गुंजी में आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 का आयोजन! सीएम धामी ने विजेताओं को किया पुरस्कृत, अगले साल माणा के पास से होगी 100 माइल्स अल्ट्रा रन
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजी में रविवार को ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0’ का उत्साहपूर्ण वातावरण में समापन हुआ। इस साहसिक मैराथन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर वर्ग की दौड़ पूरी करने वाले विजेताओं को पुरस्कृत किया। साथ ही उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का हौसला बढ़ाया। आयोजन स्थल पर स्थानीय रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। धावकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल एक पारंपरिक दौड़ नहीं, बल्कि अदम्य साहस, संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की कड़ी परीक्षा है। समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर बसे इस भूभाग में विषम भौगोलिक परिस्थितियों, बर्फीले मौसम और सीमित ऑक्सीजन के बीच इतनी लंबी दूरी तय करना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने आयोजन को सफल बनाने के लिए भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस तथा सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों व जवानों के योगदान की विशेष रूप से सराहना की और उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने साहसिक खेलों के क्षेत्र में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में प्रदेश में 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन का आयोजन किया जाएगा। यह ऐतिहासिक दौड़ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देश के प्रथम गांव माणा पास से प्रारंभ होगी, जो बदरीनाथ और जोशीमठ से गुजरते हुए अंतरराष्ट्रीय शीतकालीन क्रीड़ा केंद्र औली में संपन्न होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से देश-दुनिया के एथलीटों को उत्तराखंड की अनूठी भौगोलिक परिस्थितियों, संस्कृति और साहसिक पर्यटन की असीम संभावनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने पिछले अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में आयोजित पहले संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने भाग लिया था। इस आयोजन की निरंतरता ने क्षेत्र में पर्यटन को नई ऊर्जा दी है, जिसके चलते पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आदि कैलाश क्षेत्र के लिए जारी होने वाले इनर लाइन परमिट की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप अब सीमावर्ती क्षेत्रों को अंतिम गांव न मानकर ‘देश के प्रथम गांव’ का गौरव दिया गया है। वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत इलाकों में सड़कों, संचार और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से कायाकल्प किया जा रहा है।