Oct 24, 2026 Login
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उत्तराखण्डः सरकारी कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू! जमीनों के लेन-देन और बीमा एजेंसी को लेकर बदलाव, अधिसूचना जारी

Uttarakhand: New rules implemented for government employees! Changes introduced regarding land transactions and insurance agencies; notification issued.

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और शुचिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी सेवक किसी भी ऐसे व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संस्थान के साथ जमीन या अचल संपत्ति की खरीद-फरोख्त नहीं कर सकेंगे, जिसका सरकार के साथ प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष लेन-देन है। ऐसा करने से पहले कर्मचारियों को सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। कार्मिक विभाग ने कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन करते हुए इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। संशोधित नियमावली में ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों के टकराव) को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी की पत्नी या उन पर आश्रित कोई भी रिश्तेदार कर्मचारी की तैनाती वाले जिले में बीमा एजेंट या कमीशन आधारित वित्तीय प्रतिनिधि के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा। अक्सर देखा जाता था कि अधिकारी अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर परिजनों के नाम पर बीमा या अन्य वित्तीय एजेंसियों का कारोबार चमकाते थे, जिस पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अधिसूचना के मुताबिक, कर्मचारी को अपने नाम पर अथवा परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर जमीन, मकान या कोई भी अचल संपत्ति खरीदने, बेचने अथवा उपहार स्वरूप स्वीकार करने के लिए निर्धारित औपचारिक अनुमति प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करना होगा। सरकार के साथ व्यापारिक या ठेकेदारी संबंध रखने वाली किसी भी इकाई से जुड़े सौदों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी, ताकि किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या अनुचित लाभ की गुंजाइश न रहे। नियमावली में कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण देने की व्यवस्था भी स्पष्ट की गई है। समूह-क, ख और ग के कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा, जबकि समूह-घ के कर्मचारियों के लिए यह अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है। न केवल जमीन-जायदाद, बल्कि चल संपत्ति के मामलों में भी वित्तीय सीमा तय की गई है। यदि कोई कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो उसे लेन-देन के एक माह के भीतर इसकी लिखित सूचना नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी।