उत्तराखण्डः नानकमत्ता में पुलिस दबिश के दौरान महिला की मौत का मामला! कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, पुलिसकर्मी लाईन हाजिर

 Uttarakhand: A woman died during a police raid in Nainital! Serious questions have been raised about the police's functioning, and police officers have been placed on the police lines.

नानकमत्ता। नानकमत्ता के ग्राम सिद्धा में पुलिस कार्रवाई ने एक बार फिर कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक नाबालिग को भगाने के आरोपी की तलाश में गई पुलिस टीम की दबिश उस वक्त विवादों में घिर गई, जब घर में मौजूद एक बुजुर्ग महिला की अचानक मौत हो गई। आरोप है कि पुलिसकर्मियों की धक्का-मुक्की के बाद महिला गिर पड़ी और समय पर इलाज न मिलने से उसकी जान चली गई। घटना के बाद जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है, वह है क्या पुलिस कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार किया गया? परिजनों का आरोप है कि जब महिला की हालत बिगड़ी, तब भी पुलिसकर्मियों ने गंभीरता नहीं दिखाई और उसे नौटंकी बताकर नजरअंदाज किया। अगर यह सच है, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता का उदाहरण भी है। घटना के बाद इलाके में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को थाने के सामने रखकर प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

लोगों का कहना है कि पुलिस का यह रवैया आम नागरिकों के भरोसे को तोड़ता है।  एसओजी प्रभारी उमेश कुमार के परिजनों को समझने के बाद ही मामला शांत हुआ। देर रात्रि एसएसपी ने मामले में कार्रवाई करते हुए कोतवाली के दरोगा सुनील कुमार, मुख्य आरक्षी नवनीत कुमार, लोकेश तिवारी, बबिता रानी को लाइन हाजिर कर दिया है और मामले की जांच पुलिस अधीक्षक रुद्रपुर को सौंपी गई है। मामले में सवाल यह भी उठता है कि क्या दबिश के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं? हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित दरोगा और पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। लेकिन क्या सिर्फ इतनी कार्रवाई पर्याप्त है? यह सवाल अब आम जनता के बीच गूंज रहा है। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते पर भी एक गहरी चोट है। जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिले। साथ ही पुलिस विभाग को भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार कर यह सुनिश्चित करना होगा कि कानून का पालन करते समय इंसानियत कभी पीछे न छूटे।