उत्तराखंड: हाईकोर्ट में आया अनोखा मामला!दो बच्चों की मां को पति का घर छोड़कर प्रेमी के साथ रहने की दी परमिशन! विवाह व्यवस्था के लिए खतरनाक बताते हुए सोशल मीडिया में छिड़ी ज़ोरदार बहस!जानिए पूरा मामला
उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक ऐसे केस की सुनवाई हुई जिसकी चर्चा आज सोशल मीडिया से लेकर हर जगह हो रही है। हाईकोर्ट ने एक शादीशुदा महिला को उसकी इच्छानुसार अपने लिव इन पार्टनर के साथ रहने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट द्वारा दी गयी इस अनुमति की अब हर जगह चर्चा है।
आइये जानते है आखिर मामला क्या है।
दरअसल प्रेमी के साथ मनमुताबिक रहने के यह निर्देश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने अपनी "लापता" पत्नी के लिए देहरादून के एक जिम ट्रेनर पति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
सुनवाई के दौरान जिम ट्रेनर की पत्नी कोर्ट में पेश हुई और कहा कि वह अपने पति, 10 साल की बेटी और छह साल के बेटे को छोड़कर हरियाणा के फरीदाबाद में अपने 'लिव-इन पार्टनर' के साथ रह रही है।
महिला ने कोर्ट को बताया वो अपने पति,दस साल के बेटे और 6 साल की बेटी को छोड़कर फरीदाबाद में अपने लिव इन पार्टनर के साथ रह रही थी,महिला ने बताया कि उसकी मुलाकात इंटरनेट के माध्यम से हुई थी। उसने ये भी बताया कि उसका पति उसके साथ बुरा बर्ताव करता था,इसीलिए वो उसके साथ नही रहना चाहती थी।
महिला की शादी फरवरी 2012 में हुई थी,लेकिन 37वर्षीय इस महिला का अफेयर फरीदाबाद के एक व्यक्ति से हो गया। 7 अगस्त 2022 को ये महिला अपना घर छोड़कर फरीदाबाद उस व्यक्ति के साथ रहने लगी। महिला के 45 वर्षीय पति ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका दायर करते हुए देहरादून और फरीदाबाद के एसएसपी को निर्देश देने की मांग की,और पत्नी को फरीदाबाद के व्यक्ति के साथ अवैध कारावास से छुड़ाने की मांग की।
मामले की सुनवाई जस्टिस पंकज पुरोहित और मनोज तिवारी की खंडपीठ में हुई जिसमें कोर्ट ने 4 मई को देहरादून और फरीदाबाद की पुलिस प्रमुख को महिला को कोर्ट में पेश करने को कहा। सोमवार को महिला ने कोर्ट में पेश होकर कहा कि वह अपनी इच्छा से फरीदाबाद गई थी जहां वह अपने प्रेमी के साथ रह रही है। उसका पति उसके साथ दुर्व्यवहार करता था और वह अब देहरादून में उसके साथ नहीं रहना चाहती।
कोर्ट ने महिला को उसके प्रेमी के साथ लिव इन मे रहने की अनुमति दे दी है जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील अरुण शर्मा ने कहा कि वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे क्योंकि विवाह जैसी व्यवस्था के लिए ये खतरनाक है। पति को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ लिव इन मे बिना शादी के रहने की अनुमति पर अब सोशल मीडिया में बहस छिड़ी है