रुद्रपुर में बिरयानी पर 'बवाल': पहचान छिपाकर रजिस्ट्रेशन करने का आरोप,युवाओं ने किया हंगामा, पुलिस ने संभाला मोर्चा
रुद्रपुर। उत्तराखंड के रुद्रपुर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर नाम बदलकर व्यापार करने के गंभीर आरोप में एक रेस्टोरेंट संचालक को पुलिस ने हिरासत में लिया है। त्रिशूल चौक क्षेत्र में हुए इस घटनाक्रम के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जिसे पुलिस ने मौके पर पहुँचकर नियंत्रित किया। आरोप है कि संचालक ने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर दूसरे समुदाय के नाम से रेस्टोरेंट का पंजीकरण कराया था, जिससे ग्राहकों को भ्रमित किया जा रहा था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक स्थानीय युवक ने ऑनलाइन एप के माध्यम से चिकन बिरयानी का ऑर्डर दिया। ऑर्डर देते समय युवक को संदेह हुआ कि जिस नाम से त्रिशूल चौक पर दुकान दिखाई जा रही है, वास्तव में उस नाम का कोई प्रतिष्ठान वहां मौजूद ही नहीं है। संदेह होने पर युवक ने अपने साथियों को सूचित किया और वे सभी उस लोकेशन पर पहुँच गए जहाँ से ऑर्डर पिक किया जाना था। युवाओं की टीम ने मौके पर छिपकर डिलीवरी राइडर का इंतजार किया। जैसे ही राइडर एक विशेष समुदाय के युवक द्वारा संचालित रेस्टोरेंट से बिरयानी का पैकेट लेकर निकला, युवाओं ने उसे रोक लिया। पूछताछ और जांच में पता चला कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रेस्टोरेंट का नाम हिंदू पहचान के साथ पंजीकृत था, जबकि उसे संचालित करने वाला व्यक्ति दूसरे समुदाय का था। इस खुलासे के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और युवाओं ने इसे 'धार्मिक पहचान छिपाकर व्यापार करने' का प्रयास बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता देख स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। रुद्रपुर कोतवाली के एसएसआई अनिल जोशी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और आक्रोशित युवाओं को शांत कराया। पुलिस ने स्थिति बिगड़ने से पहले ही रेस्टोरेंट संचालक को हिरासत में ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसआई अनिल जोशी ने बताया कि शिकायतकर्ता की तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। किसी भी व्यक्ति को शहर की शांति व्यवस्था भंग करने या कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह मामला फिलहाल पूरे शहर और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता पर भी सवाल उठा रहे हैं।