गंगोलीहाटः 100 करोड़ की चार पेयजल योजनाएं अधूरी! कई गांव अब भी पानी को तरसे, बिना जलापूर्ति शुरू हुए उद्घाटन पर उठे सवाल

Gangolihat: Four drinking water projects worth 100 crore rupees remain incomplete! Many villages still thirst for water, and the inauguration raises questions about the lack of water supply.

गंगोलीहाट। गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही चार प्रमुख पेयजल पंपिंग योजनाएं वर्षों की देरी, खराब निर्माण गुणवत्ता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण अधूरी पड़ी हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता डी.एस. सुगड़ा ने उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम को पीपीआईएल लीगल  नोटिस जारी किया है। सूचना के अधिकार से मिले दस्तावेजों के अनुसार, विभाग ने पूर्व में इन योजनाओं को अक्टूबर 2025 तक चालू करने का दावा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। आज भी क्षेत्र के कई गांव नियमित जलापूर्ति से वंचित हैं। इधर ग्वासीकोट पंपिंग के मुख्य टैंक में पानी जगह-जगह रिस रहा है, जबकि विभाग का कहना है कि परीक्षण पूरी तरह कर लिया गया है। ऐसे में ठेकेदार द्वारा किए गए कार्य और विभाग द्वारा किए गए निरीक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। 

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार चारों परियोजनाओं का विवरण
बेलपट्टी ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना: लागत 44.56 करोड़ रुपये, पूर्ण होने की तिथि 31.12.2025।
ग्वासीकोट ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना: लागत 8.10 करोड़ रुपये, पूर्ण होने की तिथि 30.07.2024।
पोखरी-भेरंग ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना: लागत 19.84 करोड़ रुपये, पूर्ण होने की तिथि 03.11.2025।
वासुकीनाग ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना: लागत 25.74 करोड़ रुपये, पूर्ण होने की तिथि 31.12.2025।

 
निर्माण में गंभीर कमियां और वित्तीय अनियमितताएं

डी.एस. सुगड़ा ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा समय पर बजट आवंटित न करने और ग्वासीकोट योजना में भूमि विवाद के कारण काम लगातार टलता गया। वर्तमान में निर्मित जलाशयों और टैंकों में तकनीकी खामियां साफ नजर आ रही हैं। खराब कार्य गुणवत्ता के कारण विभाग ने संबंधित ठेकेदारों पर 50 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया है, जिससे विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसी बीच क्षेत्र में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बिना हर घर तक पानी पहुंचाए, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा ने तामझाम के साथ 'बेलपट्टी पेयजल पंपिंग योजना' का उद्घाटन कर दिया, जिसे स्थानीय जनता के साथ एक बड़ा छलावा बताया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता ने मांग की है कि इन सभी योजनाओं की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो, और दोषी ठेकेदारों को अगले 10 वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 30 दिनों के भीतर इस पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी और क्षेत्र में लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड पेयजल निगम, कुमाऊं के मुख्य अभियंता आलोक कुमार ने 21 मई 2026 को अधीक्षण अभियंता (निर्माण मंडल, पिथौरागढ़) को निर्देशित किया है कि वे इस शिकायत का संज्ञान लें। उन्होंने मामले की पूरी जांच कर 7 दिनों के भीतर निस्तारण आख्या (रिपोर्ट) मुख्य कार्यालय और प्रधान कार्यालय को सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं।