कंगना के बयान पर सड़क से लेकर सदन तक हंगामा! पहले कहा गटर जेनरेशन, अब वीडियो जारी कर दी सफाई
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर चले छात्र आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ रील्स और कथित आपत्तिजनक भाषा पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने ‘जेन जी’ यानी नई पीढ़ी को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग को निशाने पर लेते हुए ‘गटर जेनरेशन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। कंगना के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और सड़क से लेकर सदन तक विपक्षी दलों ने उनके बयान को लेकर सवाल उठाए हैं। कंगना ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी प्रतिक्रिया में प्रदर्शन के दौरान इस्तेमाल की जा रही भाषा और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ रील्स पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में इतना अजीब और खराब कुछ नहीं देखा। कंगना ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इन युवाओं को किसने जन्म दिया और कौन इनका पालन-पोषण कर रहा है। उन्होंने प्रदर्शन से जुड़ी कुछ सामग्री का हवाला देते हुए नई पीढ़ी को ‘गटर की पीढ़ी’ तक कह दिया। उनके बयान का एक हिस्सा विशेष रूप से चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारी युवतियों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। कंगना ने कहा कि ऐसी लड़कियां अच्छी गृहिणी भी नहीं बन सकतीं। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। आलोचकों ने इसे युवाओं और महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी बताया, जबकि कंगना के समर्थकों ने कहा कि उनका निशाना प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अश्लील भाषा और आपत्तिजनक व्यवहार करने वाले लोगों पर था।
अश्लील व्यवहार को सामान्य नहीं बनाया जा सकता
विवाद बढ़ने के बाद कंगना रनौत ने 29 जुलाई को एक वीडियो जारी कर अपने बयान पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण विरोध या पूरी युवा पीढ़ी से नहीं, बल्कि कुछ लोगों के कथित ‘अनैतिक’ और ‘अश्लील’ व्यवहार से है। कंगना ने कहा कि उन्होंने कुछ प्रदर्शनकारियों के व्यवहार और छोटे-बुजुर्गों तथा महिलाओं के सामने कथित तौर पर अश्लील आचरण को सामान्य बनाने के प्रयास का विरोध किया है। उनका कहना था कि भारतीय समाज इस तरह के व्यवहार को स्वीकार नहीं करता और न ही इसे सामान्य बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मीडिया पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनके बयान के एक हिस्से को लेकर उन्हें घेरा जा रहा है, जबकि उनके द्वारा युवाओं और देश के स्टार्टअप क्षेत्र की उपलब्धियों की सराहना किए जाने की बातों को सामने नहीं लाया जा रहा। कंगना ने कहा कि उनके परिवार और रिश्तेदारों में भी जेन जी पीढ़ी के लोग हैं और वह पूरी पीढ़ी के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना था कि कुछ सोशल मीडिया फॉलोअर्स, कमेंट्स और लाइक्स के लिए मीडिया उनके बयान को अलग तरीके से पेश कर रहा है।
मर्यादा में रहना कोई विकल्प नहीं
कंगना ने अपने वीडियो में कहा कि समाज में रहते हुए हर व्यक्ति को एक मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान और सामाजिक नियमों की सीमा के भीतर रहना जरूरी है। उनके अनुसार, किसी व्यक्ति की निजी पसंद अलग हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर दूसरों का अपमान करने या अश्लील भाषा का इस्तेमाल करने को सही नहीं ठहराया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में भी कंगना ने कहा कि अलग-अलग लोग उन्हें अलग-अलग नजरिए से देखते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में किसी के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल होने या ‘कूल’ दिखने की कोशिश के बजाय अनुशासन और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कंगना ने अपने बयान में कुछ महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और ‘फेमिनिज्म’ को लेकर भी टिप्पणी की और युवा महिलाओं को इस तरह के प्रभाव से बचने की सलाह दी। उनके इस बयान पर भी सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। आलोचकों का कहना है कि महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और उनके व्यवहार को लेकर इस तरह की सामान्यीकृत टिप्पणी उचित नहीं है।
विवादों से कंगना का पुराना नाता
कंगना रनौत इससे पहले भी किसान आंदोलन, बॉलीवुड और विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर अपने बयानों के कारण विवादों में रही हैं। उनके बयानों को लेकर कई बार राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। हालांकि, कंगना अक्सर अपने बयानों पर कायम रहते हुए बाद में अपनी बात स्पष्ट करती रही हैं। किसान आंदोलन के दौरान भी कंगना की कुछ टिप्पणियों ने राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा किया था। दिसंबर 2020 में उन्होंने किसान आंदोलन में शामिल बुजुर्ग महिला किसान महिंदर कौर को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। उस समय उनके बयान की व्यापक आलोचना हुई थी। कंगना की टिप्पणी को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि बाद में उन्होंने अपने बयान को लेकर सफाई भी दी थी।
किसान आंदोलन को लेकर भी दिया था विवादित बयान
कंगना ने बाद में किसान आंदोलन की तुलना बांग्लादेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम से करते हुए भी टिप्पणी की थी। उन्होंने आशंका जताई थी कि यदि देश का नेतृत्व मजबूत नहीं होता तो भारत में भी बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने किसान आंदोलन के पीछे कथित साजिश का आरोप लगाते हुए विदेशी ताकतों के शामिल होने की बात कही थी। कंगना के इस बयान के बाद भाजपा ने भी उनसे दूरी बनाते हुए कहा था कि पार्टी उनके विचारों से सहमत नहीं है। पार्टी की ओर से उन्हें भविष्य में इस तरह के बयान देने से बचने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई थी।