जामिया में बवालः छात्र आंदोलन के बीच पुलिस तैनाती और हिरासत से गरमाया माहौल! लाइब्रेरी-कैंटीन बंद, सोमवार से ऑनलाइन होंगी कक्षाएं
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ बहाली और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चल रहा गतिरोध अब गंभीर रूप अख्तियार कर चुका है। पिछले दो सप्ताह (14-15 दिनों) से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के आंदोलन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर के सभी मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए हैं। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए गेट नंबर 4 और गेट नंबर 7 के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। परिसर में प्रवेश रोके जाने से दिनभर हंगामे की स्थिति बनी रही और अंदर जाने की जिद कर रहे कई छात्रों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियातन लाइब्रेरी, कैंटीन समेत अन्य सभी शैक्षणिक व छात्र सुविधाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है। प्रशासन ने सोमवार से सभी कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने ऑनलाइन कक्षाओं का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया है और इस संबंध में कुलपति को औपचारिक पत्र भेजा है। आंदोलनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को कुचलने के लिए दमनकारी रास्ते अपना रहा है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों तक पीने का पानी भी नहीं पहुंचने दिया जा रहा है। छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मौखिक रूप से हॉस्टल खाली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि इब्न सीना लाइब्रेरी देर रात दो बजे तक खुलती थी, जहां छात्र शांति से अध्ययन करते थे। कई छात्र एक कमरे में सात-सात लोग रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, ऐसे में लाइब्रेरी और परिसर बंद होने से उनकी शिक्षा और भविष्य पर गहरा असर पड़ रहा है। आंदोलनरत छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी तीन सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होतीं, प्रदर्शन जारी रहेगा। छात्रों के इस आंदोलन को शिक्षकों के संगठन ‘डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव’ (DTI) का भी खुला समर्थन मिला है। डीटीआई ने आधिकारिक बयान जारी कर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हो रही दंडात्मक कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। संगठन ने कहा कि छात्र पिछले दो हफ्ते से अनशन पर हैं। यद्यपि प्रशासन ने छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है, लेकिन चुनाव कराने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। डीटीआई ने आरोप लगाया कि 24 अक्टूबर को शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के कुछ तत्वों द्वारा छात्रों की एकजुटता को तोड़ने के लिए बलप्रयोग किया गया, जिसके बाद परिसर बंद कर कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गईं। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि छात्रों पर किए गए सभी दंडात्मक कदम तुरंत निरस्त किए जाएं और छात्र संघ चुनाव की स्पष्ट तिथि घोषित कर परिसर में सामान्य शैक्षणिक माहौल बहाल किया जाए।