एलपीयू में बेकाबू बवाल: रातभर हिंसा और तोड़फोड़, इंटरनेट बंद; दातर व वॉकी-टॉकी संग 5 गिरफ्तार, डीजीपी बोले-किसी को नहीं बख्शेंगे
जालंधर। पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी कैंपस में शनिवार देर रात कथित दुष्कर्म और छात्रा की आत्महत्या की खबर के बाद भड़का आक्रोश रविवार रात भयावह हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी में बदल गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने यूनिवर्सिटी परिसर और आसपास के इलाकों में एहतियातन इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं। वहीं, पुलिस ने दातर (धारदार हथियार) और वॉकी-टॉकी सेट के साथ 5 संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया है। परिसर में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए करीब 5000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कथित यौन उत्पीड़न और छात्रा की मौत से जुड़ी खबरों के बाद शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया। कैंपस में तोड़फोड़, आगजनी, पुलिस के साथ झड़प और राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किए जाने के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। पुलिस ने पांच युवकों को हिरासत में लिया है। उनके पास से एक ‘दातर’ और वॉकी-टॉकी सेट बरामद होने की जानकारी पुलिस ने दी है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया है। रविवार को प्रदर्शनकारी छात्रों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया था। कई घंटे तक चले गतिरोध के दौरान कैंपस में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कुछ वाहनों में आग लगाए जाने की खबरें सामने आईं। रविवार शाम एक बार फिर तनाव बढ़ा और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की। एक पुलिस जीप जलाए जाने और तीन वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना सामने आई। 27वीं बटालियन की कमांडेंट गुरमीत कौर के मुताबिक, पुलिस ने पांच युवकों को पकड़ा है। उनके पास से दातर और वॉकी-टॉकी सेट बरामद हुआ है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वे कौन हैं और कैंपस में किस उद्देश्य से पहुंचे थे। इस बीच पंजाब पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के कारणों और हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एलपीयू पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने छात्रा की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया है और SIT जांच कर रही है। जांच के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और अन्य घटनाओं में शामिल लोगों की भूमिका भी सामने लाई जाएगी। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। हंगामे की शुरुआत छात्रावास से जुड़ी एक कथित यौन उत्पीड़न की खबर के बाद हुई। सोशल मीडिया और छात्रों के बीच फैली सूचना में एक छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया गया। हालांकि, शुरुआती चरण में पुलिस ने कहा था कि उसे ऐसी किसी घटना की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। बाद में एक छात्रा की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और एसआईटी का गठन किया गया। एलपीयू प्रशासन ने कथित दुष्कर्म की खबर को अफवाह और निराधार बताया है तथा छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने की अपील की है। ऐसे में जांच के जरिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि मूल घटना की वास्तविकता क्या थी और सोशल मीडिया पर सामने आई सूचनाओं में कितनी सच्चाई थी। हिंसा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगले आदेश तक टाल दी गई हैं। विश्वविद्यालय ने छात्रों को अभिभावकों की सलाह से अपने घर जाने की अनुमति दी है। कैंपस में रुकने वाले छात्रों को अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। प्रदर्शन के कारण एनएच-44 पर यातायात कई घंटे प्रभावित रहा। पुलिस के मुताबिक सोमवार को हाईवे पर यातायात बहाल कर दिया गया और स्थिति नियंत्रण में बताई गई। इसके बावजूद कैंपस और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कैंपस की सुरक्षा, छात्रों की शिकायतों के निस्तारण और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस जांच के जरिए हिंसा के पीछे की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।