दर्दनाक हादसाः पलभर में खत्म हो गई तीन जिंदगियां! सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से तीन मजदूरों की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ से एक दुखद खबर सामने आई है, यहां रायपुर में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के अंदर सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। हादसे में तीन युवकों की जान चली गई। बताया जाता है कि हाॅस्पिटल के सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए 10 लोगों के एक ग्रुप ने 7 हजार रुपये में ठेका लिया था। मृतकों की पहचान 26 वर्षीय प्रशांत कुमार, 35 वर्षीय गोविंद सेंद्रे और 32 वर्षीय अनमोल माचखंड के रूप में हुई है। ये सभी नगर पालिका के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले सफाई कर्मचारी थे। घटना वाले दिन प्रशांत, 30 वर्षीय सत्यम और सेवक उन 10 लोगों के ग्रुप का हिस्सा थे, जिन्होंने सेप्टिक टैंक की सफाई का काम लिया था। पुलिस के मुताबिक यह टैंक करीब 20 फीट गहरा, 15 फीट लंबा और 10 फीट चौड़ा था। यह तीन फीट तक कचरे से भरा हुआ था। प्रशांत कुमार मूल रूप से ओडिशा के रहने वाले थे और सात भाई-बहनों के परिवार का हिस्सा थे। उनके पिता की मौत के बाद उनकी मां अपने सात बच्चों के साथ रायपुर आ गईं। वे अब भटागांव इलाके की बीएसयूपी कॉलोनी में रहते हैं। सेवक, प्रशांत और सत्यम कभी स्कूल नहीं गए और रायपुर नगर निगम के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर सफाई का काम करते हैं। इनमें से हर कोई अपने कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए महीने के 7500 रुपये कमाता है। हादसे वाले दिन उनके एक साथी गोविंद सेंद्रे सबसे पहले मैनहोल के रास्ते टैंक के अंदर उतरे। उनके पीछे-पीछे अनमोल माचखंड भी अंदर गए। सेवक ने बताया कि गोविंद सीढ़ी से नीचे उतरे, लेकिन टैंक के अंदर बहुत ज़्यादा ज़हरीली गैस भरी हुई थी, जिसकी वजह से वह नीचे गिर पड़े। अनमोल अंदर गए, लेकिन वह भी नीचे गिर गए। फिर मेरा भाई प्रशांत अंदर गया और वह भी नीचे गिर गया। यह सब कुछ बस एक मिनट के अंदर हो गया। बाकी लोगों को यह एहसास हो गया था कि उनके पीछे-पीछे टैंक के अंदर जाना बहुत ज़्यादा खतरनाक होगा। सेवक ने कहा कि हम बाकी सभी लोग एक-दूसरे को कसकर पकड़े हुए थे। हम रो रहे थे और खुद को टैंक में कूदने से रोक रहे थे। प्रशांत कुमार की शादी नहीं हुई थी लेकिन अनमोल माचखंड अपने पीछे अपनी पत्नी और चार महीने के बेटे को छोड़ गए हैं। इसके अलावा अनमोल को सेप्टिक टैंक साफ़ करने का कोई अनुभव नहीं था। वह हाल ही में बेरोज़गार हो गए थे और किसी भी तरह से पैसे कमाने का कोई जरिया ढूंढने के लिए बहुत ज़्यादा बेताब थे। प्रशांत सेप्टिक टैंक के मैनहोल में इसलिए गए, ताकि वह उन दो लोगों को बचा सकें जो उनसे पहले अंदर गए थे।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने मामले में ठेकेदार किशन सोनी और अस्पताल के मैनेजमेंट के खिलाफ BNS की धारा 106 (1) (लापरवाही से मौत का कारण बनना) और ‘हाथ से मैला ढोने वालों के रोज़गार पर रोक और उनके पुनर्वास अधिनियम’ की धारा 8 (हाथ से मैला ढोने के लिए किसी को काम पर रखने पर सज़ा) और धारा 9 (सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई के लिए किसी को काम पर रखने पर सज़ा) के तहत केस दर्ज किया है। अनमोल की 25 साल की पत्नी अनुपमा ने कहा, “हमारी शादी 2022 में हुई थी और हमारा चार महीने का एक बेटा है। अनमोल ने चार बैंकों से करीब 70,000 रुपये का लोन लिया था। उसने सालों तक गवर्नर हाउस में और फिर नगर पालिका में सफाईकर्मी के तौर पर काम किया, लेकिन हाल ही में वह बेरोजगार हो गया था। उसने किसी को भी इस काम के बारे में नहीं बताया था, जिसकी वजह से उसकी जान चली गई।” पत्नी ने इस बात पर गुस्सा ज़ाहिर किया कि मजदूरों को सही उपकरण नहीं दिए गए थे।