खान फार्म विवादः हाईकोर्ट में पेश हुए एसडीएम किच्छा और एसएचओ! पीड़ित पक्ष को सुरक्षा देने के आदेश, राज्य सरकार से तीन सप्ताह में मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उधम सिंह नगर जिले के किच्छा में पिपलिया मोड़ स्थित कुलसुम खान फार्म पर जबरन कब्जा करने के बाद वहां मौजूद महिलाएं, बच्चों व बेजुबान पशुओं को सुरक्षा मुहैय्या कराए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की एकलपीठ ने एसएसपी और जिलाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि पीड़ित पक्षकारों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए। राज्य सरकार और अन्य विपक्षीगणों से कहा है कि तीन सप्ताह के भीतर जवाब पेश करें। मामले में पूर्व के आदेश पर एसडीएम किच्छा गौरव पांडे और एसएचओ किच्छा रवि कुमार व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। उनके द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया कि फार्म में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 164 का प्रयोग किया गया था। क्योंकि वहां पर माहौल सही नही था। जैसे ही उनको उच्च न्यायालय और सिविल कोर्ट का आदेश मिला उनके द्वारा 164 की कार्यवाही पर रोक लगा गयी। और सम्पति पर याचिकाकर्ताओं को कब्जा दिलाने के साथ-साथ सुरक्षा भी मुहैय्या करा दी गयी। क्योंकि इससे पहले उनको याचिकाकर्ताओं के द्वारा सिविल कोर्ट के स्टे ऑर्डर की प्रति नही दी गयी। उनके लिए यह चुनोती हो गयी थी कि कौन फार्म का असली स्वामी है। इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 164 की कार्यवाही की गई। जिसपर कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्कता से कार्य करना चाहिए। क्योंकि सोशल मीडिया का जमाना है। मामूली सी बातें बड़ा रूप ले लेती हैं। आज मामले की सुनवाई न्यायमूर्ती आलोक महरा की एकलपीठ में हुई।
मामले के अनुसार सिकंदर आलम खान ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि उधम सिंह नगर जनपद के किच्छा क्षेत्र के पिपलिया मोड़ पर स्थित कुलसुम खान फार्म है। प्रथम पक्ष जो कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी है। इसी फार्म का दूसरा पक्ष नसरीन सांगा है। अब दोनों ही पक्ष इस फार्म पर अपना अधिकार बता रही हैं। जबकि यह फार्म हाउस उनकी बुआ कुलसुम खान का है। कुलसुम खान ने अपनी यह वसीयत सायरा और उनके चचरे भाई सिकंदर आलम खान के नाम 2024 में की थी। बुआ की मृत्यु 18 दिसंबर 2025 को हो गयी थी। जैसे ही इसकी खबर दूसरे पक्ष (बुआ की बहन) को लगी तो वह छः लोगों के साथ इसपर कब्जा करने के लिए आ गए और प्रसाशन की मिलीभगत से फार्म पर कब्जा कर लिया गया। वहां पर रह रहे पुरूषों को बाहर कर दिया तथा महिलाओं, बच्चों और बेजुबानों को बाहर जाने पर रोक लगा दी। उनके साथ इनके द्वारा अभद्रता की जा रही है। वे बीते तीन दिनों से अंदर ही बन्द हैं। इस सम्बंध में उनके द्वारा प्रशासन से बात की और कहा कि उनके पास ओरिजिनल रजिस्टर्ड वसीयत है और उनको 11 जून 2026 को सिविल कोर्ट से इस मामले में स्टे मिला है। आदेश की प्रति भी दिखाई, लेकिन प्रशासन और दूसरे पक्ष के लोगों ने कोर्ट के आदेश को नही माना। और दूसरा पक्ष नसरीन सांगा को कब्जा दिला दिया। याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाया जाए। क्योंकि कोर्ट के आदेश की अवहेलना हुई है।