उत्तराखण्डः 2023 में लगी सील टूटी, फिर बस गए फ्लैट! हाईकोर्ट की सख्ती पर दोबारा कार्रवाई, 40-50 फ्लैट किए सील
मसूरी। मासौनिक लॉज डिमरी निवास के समीप स्थित विवादित छह मंजिला बहुमंजिला भवन पर सोमवार को नगर पालिका परिषद और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए करीब 40 से 50 फ्लैटों को दोबारा सील कर दिया। कार्रवाई के दौरान तीन परिवारों ने मकान खाली करने का विरोध किया, जिसके बाद एसडीएम मसूरी राहुल आनंद मौके पर पहुंचे और उन्हें 48 घंटे के भीतर भवन खाली करने के निर्देश दिए। चेतावनी दी गई कि समय सीमा पूरी होने के बाद प्रशासन बलपूर्वक कब्जा हटाएगा। बताया जा रहा है कि भवन का निर्माण बिना एमडीडीए की स्वीकृति और अग्निशमन विभाग की एनओसी के किया गया था। मामले में उच्च न्यायालय ने पहले ही यथास्थिति बनाए रखने और फ्लैटों के आवंटन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद भवन में लोगों का रहना शुरू हो गया। गौरतलब है कि वर्ष 2023 में तत्कालीन संयुक्त सचिव नंदन कुमार के नेतृत्व में जिला प्रशासन और एमडीडीए ने इसी भवन को सील किया था। आरोप है कि बाद में सील तोड़ दी गई और फ्लैटों पर कब्जे कर लिए गए। इतना ही नहीं, निर्माणाधीन हिस्सों में भी नए फ्लैट बनाकर उनमें लोग रहने लगे। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पालिका और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम राहुल आनंद ने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देश सर्वोपरि हैं और उनका पालन हर हाल में कराया जाएगा। जिन तीन फ्लैटों में लोग रह रहे हैं, उन्हें 48 घंटे का समय दिया गया है। इसके बाद भी भवन खाली नहीं किया गया तो प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भवन की स्थिति को लेकर उच्च न्यायालय ने रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई में न्यायालय जो भी आदेश देगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। यदि न्यायालय ध्वस्तीकरण के आदेश देता है तो प्रशासन उसे भी लागू करेगा। एमडीडीए के सहायक अभियंता अजय मलिक ने बताया कि वर्ष 2023 में पूरे भवन के नए निर्माण को सील किया गया था, लेकिन बाद में लोगों ने सील तोड़कर फ्लैटों पर कब्जा कर लिया और कुछ स्थानों पर नए निर्माण भी कर लिए। उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में सभी फ्लैटों को दोबारा सील किया गया है और प्राधिकरण अगली सुनवाई में अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा। कार्रवाई के दौरान फ्लैट स्वामियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब भवन का निर्माण हो रहा था, तब प्रशासन ने उसे नहीं रोका। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल फ्लैट सील करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि 2023 में लगी सील कैसे टूटी, न्यायालय के आदेशों के बावजूद भवन में कब्जे कैसे हुए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी। अब पूरे मामले में सभी की निगाहें उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां भवन के भविष्य पर अंतिम निर्णय सामने आ सकता है।