बड़ी खबरः अरुणाचल में चीनी घुसपैठ के वायरल दावे ने बढ़ाई टेंशन! पूर्व रॉ एजेंट और PIB फैक्ट चेक ने बताई सच्चाई, लिंक में जानें क्या है पूरा मामला

Big News: Viral claim of Chinese incursion in Arunachal sparks tension! Former RAW agent and PIB Fact Check reveal the truth; find out the full story at the link.

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में भारत की सीमा के भीतर कई किलोमीटर तक घुस आई है और वहां नए कैंप भी स्थापित कर दिए हैं। वायरल पोस्टों में यह भी कहा गया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबांसरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में करीब 60 किलोमीटर तक भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश कर चुकी है। इस दावे ने लोगों के बीच चिंता और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी। हालांकि, भारत सरकार की फैक्ट चेक इकाई PIB Fact Check और पूर्व रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) अधिकारी ने इन दावों को पूरी तरह भ्रामक और फर्जी बताया है। पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल वीडियो साझा करते हुए कहा कि इसे चीन की सेना की घुसपैठ बताकर फैलाया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई दे रहे हथियारबंद लोग चीनी सैनिक नहीं हैं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) से जुड़े लोग बताए जा रहे हैं। लकी बिष्ट के अनुसार, जिस वीडियो को अरुणाचल प्रदेश का बताकर वायरल किया जा रहा है, वह वास्तव में मणिपुर के फयांग क्षेत्र का है और यह घटना भी कुछ दिन पुरानी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना सत्यापन के ऐसे संवेदनशील वीडियो साझा न करें, क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर अनावश्यक भ्रम फैलता है।

इधर, भारत सरकार की आधिकारिक फैक्ट चेक एजेंसी PIB Fact Check ने भी वायरल दावे का खंडन करते हुए साफ कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे वीडियो का भारत-चीन सीमा या किसी कथित घुसपैठ से कोई संबंध नहीं है। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के 60 किलोमीटर तक घुस आने का दावा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। PIB ने कहा कि वायरल वीडियो को गलत संदर्भ के साथ प्रस्तुत किया गया है। ऐसे वीडियो अक्सर पुराने होते हैं या किसी अन्य स्थान की घटनाओं से जुड़े होते हैं, जिन्हें नए दावों के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया जाता है। इससे आम लोगों में भ्रम फैलता है और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर गलत सूचनाएं तेजी से फैलने लगती हैं। भारत-चीन सीमा से जुड़े मामलों को हमेशा संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में किसी भी अपुष्ट वीडियो, फोटो या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी सही नहीं होती और कई बार गलत सूचनाएं जानबूझकर भी फैलायी जाती हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि सीमा सुरक्षा, सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल आधिकारिक सरकारी स्रोतों और सत्यापित जानकारी पर ही भरोसा करें। किसी भी अपुष्ट या भ्रामक सामग्री को साझा करने से बचें, ताकि अफवाहों और गलत सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके।