Oct 25, 2026 Login
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तनावः फ्रांस-इटली समेत यूरोप के कई देशों में बिगड़े हालात! महंगाई-बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग

Tension: Situation worsens in several European countries, including France and Italy! Hundreds of thousands take to the streets to protest against inflation, unemployment, and economic crisis.

नई दिल्ली। यूरोप के कई प्रमुख देश इस समय गंभीर आर्थिक और सामाजिक असंतोष की आग में झुलस रहे हैं। सप्ताहांत के दौरान फ्रांस, अल्बानिया, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में महंगाई, गहराते आवास संकट, पेंशन कटौती, शिक्षा व्यवस्था में गिरावट, भ्रष्टाचार और युद्ध नीतियों के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी व हिंसक झड़पें हुईं, जिसके चलते सरकारों को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ी और कुछ स्थानों पर सेना तक उतारनी पड़ी। फ्रांस में शनिवार को जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया। देश के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देश भर में करीब 1,000 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है। रैलियों में शामिल लोगों की संख्या सरकार ने 4.10 लाख बताई है, जबकि आयोजकों का दावा है कि 8 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जबकि आसमान से हेलीकॉप्टरों के जरिए निगरानी रखी गई। वामपंथी नेता ज्यां-लुक मेलेंशों ने पुलिस बल प्रयोग की तीखी आलोचना की, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चुनावी रैली में इन हालातों के लिए फ्रांस की इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। अल्बानिया की राजधानी तिराना समेत कई शहरों में छात्रों के नेतृत्व में हिंसक प्रदर्शन हुए। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खस्ताहाल शिक्षा के खिलाफ प्रदर्शनकारियों ने कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर आग लगा दी और बैंकों पर पथराव किया।

प्रदर्शनकारियों ने ट्यूशन फीस घटाने, शिक्षा बजट बढ़ाने और प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग की। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने रबर की गोलियों, आंसू गैस और वॉटर कैनन का सहारा लिया। इटली के रोम, मिलान, ट्यूरिन और फ्लोरेंस में युवाओं ने मार्च निकाला। रोम में प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक कोलोसियम में जबरन घुसने की कोशिश की, जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। हिंसा की आशंका से मिलान के मशहूर फैशन हब में दुकानों ने खिड़कियों पर सुरक्षा बोर्ड लगा दिए थे। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मिलान में 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की घोषणा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित है, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। आठ शहरों से 371 लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में हजारों पेंशनभोगियों ने न्यूनतम पेंशन को न्यूनतम वेतन के बराबर करने, निजीकरण पर रोक लगाने और महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ा मार्च निकाला। यह प्रदर्शन अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले हुआ है। वहीं पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में लोग गंभीर आवास संकट (हाउसिंग क्राइसिस) के खिलाफ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने रॉसियो स्क्वायर पर 100 से ज्यादा टेंट लगाकर डेरा डाल दिया, जिसे पुलिस ने बलपूर्वक हटाया। प्रदर्शनकारी नए किराया कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2017 के बाद से पुर्तगाल में घरों की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं और देश में करीब 3 लाख घरों की भारी किल्लत है। यूरोप में गहराता यह जनआक्रोश सरकारों की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।