फटा हुआ दूध बना 'जहर': एक ही परिवार के 10 लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार, 8 मासूम बच्चे और 2 महिलाएं अस्पताल में भर्ती

Spoiled milk turns toxic: 10 members of the same family fall victim to food poisoning; 8 young children and 2 women hospitalized.

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र से फूड पॉइजनिंग (खाद्य विषाक्तता) का एक बेहद चौंकाने वाला और आंखें खोलने वाला मामला सामने आया है। यहाँ कीरतपुरा गांव में फटे हुए दूध से बनी एक डिश (खाद्य पदार्थ) खाने के कारण एक ही परिवार के 10 लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए। पीड़ित होने वालों में 1 वर्ष के मासूम से लेकर 14 वर्ष तक के 8 बच्चे और 2 महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सभी बीमारों को गोपालगंज सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

जानकारी के अनुसार, कीरतपुरा गांव के रहने वाले अनिल सहनी और रजानति देवी के घर में दूध फट गया था। दूध को फेंकने के बजाय उससे एक खाद्य पदार्थ तैयार किया गया। दोपहर के समय परिवार के सभी सदस्यों ने बड़े चाव से इसे खाया, लेकिन उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि यह स्वाद चंद मिनटों में आफत बन जाएगा। खाना खाने के कुछ ही देर बाद एक-एक कर सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। सबसे पहले मासूम बच्चों ने पेट में असहनीय तेज दर्द और लगातार उल्टी होने की शिकायत की। देखते ही देखते महिलाओं और परिवार के अन्य सदस्यों को भी चक्कर आने लगे और वे अत्यधिक कमजोरी के कारण निढाल हो गए। स्थिति को बेकाबू और गंभीर होते देख ग्रामीण और परिजन बिना समय गंवाए सभी को लेकर सीधे गोपालगंज सदर अस्पताल भागे। इस फूड पॉइजनिंग की घटना में सबसे ज्यादा मार घर के छोटे बच्चों पर पड़ी है। बीमार होकर अस्पताल पहुंचने वालों ऋषभ कुमार (1 वर्ष), अभिराज कुमार (2 वर्ष), ऋतिक कुमार (5 वर्ष), अतुल कुमार (9 वर्ष), सिमरन कुमारी (11 वर्ष), मोनालिसा कुमारी (11 वर्ष), प्रियांशु कुमारी (12 वर्ष) और प्रिया कुमारी (14 वर्ष) मनीषा (30 वर्ष) और रजानति देवी (35 वर्ष) शामिल है।  सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में मुस्तैद चिकित्सक डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि जब मरीजों को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी हालत काफी चिंताजनक और नाजुक थी। डिहाइड्रेशन के कारण बच्चे बेहोशी की हालत में थे। हालांकि, त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरंत इलाज और ड्रिप शुरू की गई, जिसके कारण अब सभी की स्थिति पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण में है। डॉ. पंकज कुमार के अनुसार, प्राथमिक जांच और लक्षणों से यह साफ तौर पर फूड पॉइजनिंग का मामला है। भीषण गर्मी और उमस के मौसम में फटे हुए दूध को रखने या उसकी डिश बनाने के दौरान उसमें बेहद हानिकारक बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला या ई-कोलाई) तेजी से पनप जाते हैं, जो शरीर में जाते ही संक्रमण फैलाते हैं। फिलहाल सभी मरीज खतरे से बाहर हैं, लेकिन सटीक कारणों की पुष्टि के लिए आवश्यक मेडिकल और ब्लड सैंपल जांच कराई जा रही है। इस घटना के बाद से कीरतपुरा गांव में दहशत और कौतूहल का माहौल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अलर्ट पर है। डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि वर्तमान मौसम में बासी भोजन, फटे हुए दूध, कटे हुए फलों या किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ का सेवन बिल्कुल न करें। जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।