अनोखा विरोध: यहां स्कॉर्पियो की निकली 'शव यात्रा'! 20 लाख का डिब्बा, मौत का सामान' लिखकर सड़कों पर उतरे लोग, जानें क्या है मामला

Unique Protest: A 'Funeral Procession' for a Scorpio! People took to the streets with a '20-lakh box' labeled 'an instrument of death'—find out what it's all about.

नई दिल्ली/झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां युवाओं ने एक क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो एसयूवी की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालकर वाहन निर्माता कंपनी के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सड़क हादसे के दौरान स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुले, जिसके कारण एक युवक की जान चली गई। इसी घटना को लेकर पिछले पांच दिनों से पीड़ित परिवार और बड़ी संख्या में युवा महिंद्रा एजेंसी के बाहर धरने पर बैठे हैं।

सोमवार को आंदोलन ने नया रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को शव यात्रा की तरह पूरे शहर में घुमाया। इस दौरान कार कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और कंपनी के बहिष्कार की अपील की गई। शहर की प्रमुख सड़कों से गुजरी इस यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। सोशल मीडिया पर भी इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रहे हैं।

यह पूरा मामला 20 जुलाई को झुंझुनूं के डूंडलोद बायपास पर हुए एक भीषण सड़क हादसे से जुड़ा है। हादसे में झुंझुनूं निवासी तरुण नायक की मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों और दोस्तों का आरोप है कि दुर्घटना के समय स्कॉर्पियो के एयरबैग नहीं खुले। उनका कहना है कि यदि एयरबैग समय पर खुल जाते तो शायद तरुण की जान बचाई जा सकती थी। इसी आधार पर परिजन कंपनी से जवाबदेही तय करने, निष्पक्ष जांच कराने और उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।

सोमवार को निकाली गई शव यात्रा में शामिल क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को विशेष रूप से सजाया गया था। वाहन पर लाल रंग से "20 लाख का डिब्बा" और "मौत का सामान" जैसे संदेश लिखे गए थे। इसके अलावा यात्रा में शामिल अन्य वाहनों पर भी कंपनी के बहिष्कार से जुड़े पोस्टर और स्टिकर लगाए गए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लाखों रुपये खर्च कर खरीदी गई गाड़ी यदि हादसे के समय अपने सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर के रूप में काम न करे तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है।

यह पहली बार नहीं है जब प्रदर्शनकारियों ने इस मामले को लेकर अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया हो। इससे पहले उन्होंने महिंद्रा एजेंसी के सामने क्षतिग्रस्त स्कॉर्पियो को क्रेन से लटकाकर उसे प्रतीकात्मक रूप से फांसी देने का प्रदर्शन किया था। उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था और राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना था। अब शव यात्रा निकालकर प्रदर्शनकारियों ने एक बार फिर कंपनी और प्रशासन का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित करने की कोशिश की है।

प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि चुनाव के समय युवा शक्ति की बात करने वाले नेता अब न्याय की मांग को लेकर सड़क पर बैठे युवाओं के साथ नजर नहीं आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि, "जब वोट चाहिए होते हैं तो युवा याद आते हैं, लेकिन जब युवा न्याय मांगते हैं तो कोई साथ नहीं देता।"

पीड़ित परिवार की मांग है कि दुर्घटना की स्वतंत्र और तकनीकी जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे के समय एयरबैग क्यों नहीं खुले। साथ ही यदि किसी प्रकार की तकनीकी खामी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित पक्ष पर कार्रवाई की जाए और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

हालांकि, अब तक एयरबैग नहीं खुलने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वाहन में एयरबैग का सक्रिय होना कई तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जिनमें टक्कर की दिशा, प्रभाव की तीव्रता, गति और सेंसर की प्रतिक्रिया शामिल होती है। ऐसे में इस मामले में वास्तविक स्थिति का पता विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।