संसद का विशेष सत्र: परिसीमन की 'पिच' पर महिला आरक्षण का दांव, गिरिराज बोले- 'बिल पास नहीं तो घर में खाना नहीं'

Special Session of Parliament: The 'Women's Reservation' Gambit on the 'Delimitation' Pitch; Giriraj Declares—"If the Bill Isn't Passed, There Will Be No Food at Home"

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में आज से एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का आगाज आज से हो रहा है, जिसका केंद्र बिंदु 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधन और लोकसभा की सीटों का ऐतिहासिक विस्तार है। जहाँ एक ओर सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर भविष्य की राजनीति की रूपरेखा खींचने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना ली है।

इस विशेष सत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है। प्रस्तावित विधेयक के तहत अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन किया जाएगा, जिससे 2026 से पहले की जनगणना के आधार पर सीटों का नए सिरे से निर्धारण (परिसीमन) हो सके। सरकार का तर्क है कि बढ़ती जनसंख्या के साथ जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए अनिवार्य है। विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन तो किया है, लेकिन परिसीमन की टाइमिंग और प्रक्रिया पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे सत्ताधारी दल की 'खतरनाक योजना' करार दिया है। विपक्ष का मुख्य तर्क है कि परिसीमन से उत्तर भारत के राज्यों की सीटें तो बढ़ेंगी, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा। सत्र की गहमागहमी के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने अनौपचारिक लहजे में कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग महिला आरक्षण बिल को पास करने में बाधा डालेंगे, उन्हें "घर में खाना नहीं मिलेगा।" उनका इशारा सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण के प्रति संवेदनशीलता की ओर था। विपक्ष के हंगामे की आशंका के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन आयोग अपनी प्रक्रिया शुरू करने से पहले हर राजनीतिक दल से विस्तृत सलाह-मशविरा करेगा। 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाला यह सत्र केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि 2026 के बाद की भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित होगा। क्या सरकार विपक्ष के 'क्षेत्रीय असंतुलन' के डर को दूर कर पाएगी? यह अगले तीन दिनों की बहसों से साफ हो जाएगा।