तो क्या अब खत्म होगा गदरपुर का 'गदर'? विधायक अरविंद पांडे के घर पहुंचे सीएम धामी,सियासी गलियारों में हलचल तेज,चर्चाओं का बाजार गर्म

So, will the 'Gadar' (uprising/turmoil) in Gadarpur finally come to an end? CM Dhami visited MLA Arvind Pandey's residence; political circles are abuzz, and speculation is rife.

रुद्रपुर। उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। चुनावी चौसर बिछते ही राजनीतिक दलों ने धरातल पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही प्रमुख दल चुनावी मोड में आ चुके हैं। जहां एक तरफ जनता के बीच पैठ मजबूत की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टियों के भीतर पनप रही गुटबाजी और अपनों की नाराजगी को दूर करने का दौर भी शुरू हो गया है। इसी चुनावी बयार के बीच आज गदरपुर विधानसभा क्षेत्र से सूबे की सियासत को गरमाने वाली एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों और पुख्ता खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज खुद गदरपुर पहुंचकर क्षेत्र के कद्दावर भाजपा विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आवास पर उनसे मुलाकात की। सीएम के इस औचक और महत्वपूर्ण दौरे को लेकर प्रदेशभर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

गौरतलब है कि गदरपुर से सीनियर विधायक अरविंद पांडे पिछले काफी लंबे समय से अपनी ही सरकार और संगठन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। क्षेत्र के विकास कार्यों से लेकर प्रशासनिक उपेक्षा को लेकर उनकी नाराजगी कई बार सरेआम सुर्खियां बन चुकी है। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ भी उनके तीखे तेवर और खुलकर नाराजगी कई मंचों पर सामने आई है। चुनावी साल में पार्टी के एक कद्दावर और जनाधार वाले नेता का इस तरह बागी रुख अख्तियार करना भाजपा आलाकमान के लिए भी चिंता का सबब बना हुआ था। ऐसे में अब खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अरविंद पांडे के घर जाना और उनसे सीधे संवाद करना उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में कौतूहल का विषय बन गया है। वही राजनीतिक पंडितों की मानें तो मुख्यमंत्री धामी का यह दौरा महज एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सियासी मायने छिपे हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा किसी भी तरह का आंतरिक जोखिम नहीं उठाना चाहती। ऊधम सिंह नगर जिले की राजनीति में अरविंद पांडे का अपना एक मजबूत वजूद है, और चुनाव से ठीक पहले उनका नाराज रहना भाजपा के चुनावी समीकरणों को बिगाड़ सकता है। माना जा रहा है कि सीएम धामी खुद इस 'गदर' को शांत करने के लिए आगे आए हैं। बंद कमरे में होने वाली इस संभावित वार्ता में विधायक की शिकायतों को सुनने और उन्हें जल्द दूर करने का भरोसा दिया जा सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सीएम धामी के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के बाद क्या गदरपुर का यह राजनैतिक 'गदर' हमेशा के लिए शांत होता है या फिर उत्तराखंड की सियासत में कोई नया मोड़ आने वाला है। फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।