स्मार्ट सिटी की दीवारें भी असुरक्षित?ग्वालियर में योग करती महिलाओं की छाया पेंटिंग्स में प्राइवेट पार्ट पर किया अटैक,खरोंच कर की यौन हिंसा जैसी हरकत

Smart City walls also unsafe? Shadow paintings of women practicing yoga in Gwalior show private parts being attacked, scratched and sexually assaulted.

मध्य प्रदेश की ‘स्मार्ट सिटी’ कही जाने वाली ग्वालियर से इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शहर की एक सड़क किनारे बनी सार्वजनिक दीवार पर महिलाओं के योग करते हुए सिलुएट्स वाली पेंटिंग्स को जानबूझकर खरोंचों और आपत्तिजनक निशानों से खराब कर दिया गया। इन पेंटिंग्स में महिलाओं की आकृतियों के चेहरे और शरीर के हिस्सों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया, जो किसी शरारत से कहीं आगे जाकर एक गंभीर और चिंताजनक मानसिकता की ओर इशारा करता है।


बताया जा रहा है कि ये पेंटिंग्स ‘स्मार्ट सिटी’ पहल के तहत शहर की सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। सादे काले रंग की इन सिलुएट्स में चेहरे तक नहीं बनाए गए थे, बावजूद इसके इन्हें सेक्शुअलाइज़ करने की नीयत से नुकसान पहुंचाया गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला और नागरिक चेतना, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई।


लोगों की नाराजगी के बीच एक स्थानीय नागरिक ने खुद पहल करते हुए क्षतिग्रस्त म्यूरल्स को दोबारा पेंट कर ठीक किया। इस सकारात्मक कदम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, अब तक प्रशासन इस शर्मनाक हरकत को अंजाम देने वालों की पहचान नहीं कर पाया है, जिससे कानून-व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 
खराब की गई पेंटिंग्स को ठीक करते युवा

 

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जहां एक ओर दोबारा पेंटिंग किए जाने को सराहनीय कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग इसे समस्या का अस्थायी समाधान मान रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि दीवार को दोबारा रंगना आसान है, लेकिन उस सोच को बदलना कहीं ज्यादा कठिन है, जिसने इस तरह की हरकत को जन्म दिया। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि पेंटिंग्स के साथ स्पष्ट संदेश लिखा जाना चाहिए कि महिलाओं का सम्मान इंसानियत की बुनियाद है और सार्वजनिक कला को सेक्शुअलाइज़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


इस घटना की सोशल मीडिया पर कड़ी निंदा की जा रही है। कई यूजर्स ने इसे समाज में व्याप्त ‘विकृत मानसिकता’ और ‘घटिया सोच’ का परिणाम बताया और इसे महिलाओं को वस्तु समझने की प्रवृत्ति से जोड़ा। कुछ प्रतिक्रियाएं बेहद दर्दनाक भी रहीं, जिनमें कहा गया कि जब सार्वजनिक दीवारों पर बनी महिलाओं की कलाकृतियां तक सुरक्षित नहीं हैं, तो समाज में महिलाओं की वास्तविक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
यह घटना सिर्फ एक दीवार या पेंटिंग को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज को आईना दिखाने वाली चेतावनी है—कि स्मार्ट सिटी का सपना तब तक अधूरा है, जब तक सोच और संवेदनशीलता सच में ‘स्मार्ट’ नहीं बनती।