नैनीताल:जो नर जीवै खेले फाग... पारंपरिक होली का रंग,मल्लीताल में निकला भव्य होली जुलूस!कुमाऊँनी होली गायकी पर झूमे स्थानीय लोग और पर्यटक
सरोवर नगरी Nainital में पारंपरिक कुमाऊँनी होली की धूम अपने चरम पर है। मल्लीताल स्थित रामसेवक सभा प्रांगण से निकाले गए भव्य होली जुलूस में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हुए।

पूरे क्षेत्र में अबीर-गुलाल उड़ाते हुए होलियारों ने पारंपरिक होली गायकी के साथ उत्सव का आनंद लिया। रंग-गुलाल, ढोल-दमाऊ और फाग गीतों की धुन पर लोग झूमते नजर आए और एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं दीं।

रामसेवक सभा द्वारा आयोजित इस जुलूस में बच्चों ने आकर्षक वेशभूषा पहनकर कुमाऊँ की स्वांग परंपरा को जीवंत किया, जिसने लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचा। होलियारों ने पारंपरिक अंदाज में “जो नर जीवै खेले फाग” जैसे होली गीत गाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

जुलूस मल्लीताल बाजार, आर्य समाज मार्ग, कमेटी लाइन और जयलाल साह बाजार होते हुए पुनः रामसेवक सभा प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुआ।
नैनीताल की होली पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखती है।

यहां होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं बल्कि शास्त्रीय संगीत पर आधारित बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली की समृद्ध परंपरा से जुड़ी है। कई दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में लोग घर-घर जाकर फाग गाते हैं और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष होली के समय देश-विदेश से पर्यटक नैनीताल पहुंचते हैं और इस अनोखी संस्कृति का हिस्सा बनते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कुमाऊँनी होली की खासियत इसका सादगी भरा रूप और भाईचारे का संदेश है। रंगों के साथ-साथ संगीत, लोक परंपरा और आपसी मेल-मिलाप इस पर्व को विशेष बनाते हैं, जिससे नैनीताल की होली पूरे उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देशभर में अलग पहचान रखती है।