मोदी कैबिनेट में इसी महीने बड़े फेरबदल की आहट: दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के बदलेंगे विभाग, डीएमके भी हो सकती है शामिल
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय संगठन में हालिया बदलावों के बाद अब केंद्र सरकार की टीम में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपनी कैबिनेट में बड़ा पुनर्गठन कर सकते हैं। इस फेरबदल में दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के प्रभार (मंत्रालय) बदले जा सकते हैं, जबकि कुछ चेहरों को सरकार से संगठन में वापस भेजा जा सकता है। वहीं, कुछ नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियों के साथ शामिल करने की तैयारी है।
भाजपा संगठन में बड़े बदलाव के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भी व्यापक फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से सामने आ रही चर्चाओं के मुताबिक, इसी महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव हो सकता है। इसमें करीब दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभाग बदले जाने, कुछ मंत्रियों का कामकाज घटाने और कुछ को महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपने की संभावना जताई जा रही है। कुछ नेताओं की सरकार से संगठन में वापसी भी हो सकती है। संभावित फेरबदल को केवल प्रशासनिक बदलाव के बजाय सरकार की आने वाली राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। खास तौर पर सहयोगी दलों की अपेक्षाओं, राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव और क्षेत्रीय-सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखने की चर्चा है। भाजपा ने हाल में पीयूष गोयल को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया है। इसके बावजूद उनके केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहने की संभावना बताई जा रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में फिलहाल उनका मंत्रालय बदले जाने की संभावना कम बताई जा रही है। वहीं नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके धर्मेंद्र प्रधान की सरकार में वापसी की अटकलें भी हैं। उन्हें किसी अन्य मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। उनके दोबारा उच्च सदन में भेजे जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि उनका दोबारा नामांकन नहीं होता है तो उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल खड़े होंगे। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार में फिलहाल कोई सिख मंत्री नहीं रहने की संभावना होगी। कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी बदलाव हो सकता है। राजस्थान से भाजपा नेता डॉ. अलका गुर्जर का नाम संभावित चेहरों में चर्चा में है। दक्षिण भारत को भी सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व देने पर मंथन की बात सामने आ रही है। मोदी सरकार के संभावित फेरबदल में एनडीए के सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लोजपा-रामविलास के अध्यक्ष चिराग पासवान मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की तुलना में बड़ी जिम्मेदारी की मांग कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना की ओर से भी एक और कैबिनेट पद की मांग की चर्चा है। प्रधानमंत्री मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच इस मुद्दे पर बातचीत होने की बात कही जा रही है। तमिलनाडु में द्रमुक को केंद्र सरकार में शामिल करने की संभावनाओं ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि भाजपा दक्षिण भारत में अपने राजनीतिक विस्तार और सहयोगी समीकरणों को मजबूत करने के लिए द्रमुक को साथ लाने की कोशिश कर सकती है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए कैबिनेट में संभावित बदलाव में राज्य के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी अहम होंगे। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाने की चर्चा है। ओबीसी मोर्चे में अमरपाल मौर्य को जिम्मेदारी मिलने के बाद केशव प्रसाद मौर्य का नाम अधिक चर्चा में है, हालांकि ब्रजेश पाठक भी संभावित विकल्प माने जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर जैसे बड़े नेताओं की भूमिका को लेकर भी अटकलें हैं। कुल मिलाकर संभावित फेरबदल में चुनावी रणनीति, क्षेत्रीय संतुलन, सहयोगी दलों की अपेक्षाएं और सरकार की नई प्राथमिकताएं सबसे महत्वपूर्ण कारक हो सकते हैं। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की सहमति के बाद ही स्पष्ट होगा।