लाल किले की प्राचीर से बड़ा संदेशः विकसित भारत के लिए शिक्षा, एआई, सेमीकंडक्टर, 6जी और खेलों पर जोर! प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की बड़ी बातें

A major message from the ramparts of the Red Fort: Emphasis on education, AI, semiconductors, 6G, and sports for a developed India! Key highlights of Prime Minister Modi's speech.

नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने वाला देश नहीं है। देश को बड़े सपने देखने होंगे, बड़े लक्ष्य तय करने होंगे और उन्हें हासिल करने के लिए उसी स्तर की मेहनत और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास की नई रफ्तार पकड़ी है और अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प, सामर्थ्य और ऊर्जा को रोकना नामुमकिन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के समय भारत ने अनेक सपने देखे थे, लेकिन देश अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। अब परिस्थितियां बदल रही हैं और भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ हर क्षेत्र में बड़े बदलाव करने होंगे।

‘बड़े सपने देखेगा भारत, तभी बड़े लक्ष्य हासिल होंगे’: प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बड़े सपने सिर्फ भविष्य की तस्वीर नहीं दिखाते, बल्कि सोच का विस्तार भी करते हैं। जब सपनों के साथ दृढ़ संकल्प जुड़ता है तो कठिन परिस्थितियों और आपदाओं के बीच से भी रास्ता निकालने की क्षमता पैदा होती है। उन्होंने देशवासियों से बड़े लक्ष्य तय करने और उन्हें पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा अब नई गति पकड़ चुकी है। कभी भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ जैसी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज देश दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने इसे देश की आर्थिक क्षमता और नीतिगत बदलावों का परिणाम बताया।

गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग: शिक्षा और युवाओं की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कोचिंग के बढ़ते खर्च को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि महंगी कोचिंग कक्षाएं गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ डालती हैं। सरकार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करेगी, ताकि आर्थिक स्थिति किसी छात्र की सफलता के रास्ते में बाधा न बने। उन्होंने युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की स्किल ट्रेनिंग देने का है। उन्होंने कहा कि भारत को आने वाले समय में लागत, गुणवत्ता और कौशल—इन तीनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा।

महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण की पैरवी: प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना समय की मांग है। इसके लिए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

नक्सलवाद पर पीएम का हमला: आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सली गतिविधियों को बड़ी हद तक समाप्त किया जा चुका है, लेकिन वैचारिक स्तर पर मौजूद ‘बौद्धिक नक्सलवाद’ को लेकर देश को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को समाज से अलग-थलग करने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने इसे देश की एकता, विकास और सामाजिक स्थिरता से जोड़ते हुए सावधानी बरतने का संदेश दिया।

एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई ट्रेनिंग: प्रधानमंत्री ने तकनीकी क्षेत्र में भारत की संभावनाओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीक का है। भारत को इस क्षेत्र में केवल उपभोक्ता बनकर नहीं रहना है, बल्कि दुनिया के लिए तकनीक और प्रतिभा उपलब्ध कराने वाला प्रमुख देश बनना है। सरकार अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए उत्पादन की लागत कम करने, गुणवत्ता बेहतर करने और युवाओं के कौशल को बढ़ाने पर एक साथ काम करना होगा।

2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक की मेजबानी पर नजर: खेलों के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा और देश की इच्छा 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने की भी है। उन्होंने कहा कि ओलंपिक की मेजबानी से पहले भारत को उन खेल विधाओं में अपनी भागीदारी और प्रदर्शन बढ़ाना होगा, जिनमें देश के खिलाड़ी अब तक क्वालीफाई तक नहीं कर पाते रहे हैं। प्रधानमंत्री ने खेलों को युवाओं की ऊर्जा और देश की वैश्विक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि भारत को खेलों की दुनिया में भी नई ऊंचाइयां हासिल करनी होंगी।

6जी सेमीकंडक्टर और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर जोर: प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तकनीक और इनोवेशन को विकास का प्रमुख आधार बना रहा है। देश में डेटा सेंटर और अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक तकनीक को दुनिया के हर हिस्से तक पहुंचाना लक्ष्य होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने भारत निर्मित 6जी तकनीक को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा में भारत को नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में पांच से आठ और संयंत्र स्थापित होने की उम्मीद है। इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती मिलने की संभावना है।

दुनिया की शीर्ष कंपनियों में भारतीय कंपनियों का लक्ष्य: प्रधानमंत्री ने भारतीय उद्योग और कंपनियों के लिए भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य फॉर्च्यून-500 की सूची में 50 भारतीय कंपनियों को शामिल कराना होना चाहिए। बैंकिंग क्षेत्र में भी उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारतीय उपस्थिति बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में एक भारतीय बैंक का होना चाहिए। इसी तरह भारतीय दवा कंपनियों को दुनिया की शीर्ष पांच फार्मा कंपनियों में जगह बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

सुधारों की रफ्तार बढ़ाने का आह्वान: प्रधानमंत्री ने आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की गति तेज करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सुधार केवल केंद्र सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं। केंद्र, राज्य सरकारों और सभी हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने के लिए सुधारों की गति और प्रभाव दोनों बढ़ाने होंगे। प्रधानमंत्री के संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि भारत अब सीमित लक्ष्यों के साथ आगे नहीं बढ़ सकता। 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए आज से ही बड़े फैसले, बड़े निवेश और बड़े सुधार करने होंगे।