जौहर ट्रस्ट पर ईडी का शिकंजा: रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
रामपुर। उत्तरप्रदेश के रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय (रामपुर) से जुड़े वित्तीय मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) जांच के सिलसिले में ईडी की टीमों ने उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और देश की राजधानी दिल्ली स्थित 10 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई सरकारी ठेकों से जुड़ी निधियों के कथित अवैध डायवर्जन (हेराफेरी) और निजी ठेकेदारों के माध्यम से ट्रस्ट व विश्वविद्यालय की संपत्तियों के निर्माण में इस्तेमाल किए गए धन की जांच से संबंधित है।
रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तक पहुंच गई है। ईडी की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में 10 परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने अपराध से अर्जित धन, वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की। ईडी के अनुसार, जांच का केंद्र सरकारी ठेकों से जुड़ी धनराशि के कथित डायवर्जन और उसके बाद इस रकम के इस्तेमाल से संबंधित है। आरोप है कि कुछ निजी ठेकेदारों ने सरकारी ठेकों से प्राप्त धन को कथित तौर पर ट्रस्ट अथवा विश्वविद्यालय की ओर डायवर्ट किया। इस धन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय की परिसंपत्तियों के निर्माण समेत अन्य कार्यों में किए जाने की आशंका है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर कुछ ठेकेदारों और जौहर ट्रस्ट के बीच वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े ठेकों से हासिल रकम का प्रवाह किन माध्यमों से हुआ और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। छापेमारी के दौरान एजेंसी ने वित्तीय रिकॉर्ड, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरणों में मौजूद साक्ष्यों की जांच की। कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध की आय का पता लगाने के साथ सरकारी निधियों के डायवर्जन और उसके इस्तेमाल की पूरी कड़ी को खंगालना है। जौहर विश्वविद्यालय पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहा है। विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त करने के रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के आदेश पर हाल में रोक लगाई गई थी। आरडीए के उपाध्यक्ष एवं रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के स्तर से बिना नक्शा पास कराए बनाए गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन और जौहर ट्रस्ट ने आरडीए अध्यक्ष एवं मुरादाबाद के मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह की अदालत में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के बाद मंडलायुक्त ने ध्वस्तीकरण के आदेश पर रोक लगा दी थी। ईडी की ताजा कार्रवाई के बाद जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय मामलों की जांच और तेज होने के संकेत हैं। एजेंसी अब जब्त या हासिल किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कथित धन के स्रोत, लेन-देन और उसके अंतिम इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों या संस्थाओं से पूछताछ की संभावना भी बनी हुई है।