दुखदः हिंदी साहित्य के एक युग का अंत! नहीं रहे प्रसिद्ध साहित्यकार ज्ञानरंजन, 90 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

Sad: An era of Hindi literature has ended! Renowned literary figure Gyanranjan has passed away at the age of 90.

नई दिल्ली। प्रसिद्ध कथाकार और साहित्यकार ज्ञानरंजन अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने 90 वर्ष की आयु में बुधवार देर रात जबलपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके एक पारिवारिक मित्र ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ज्ञानरंजन के पारिवारिक मित्र पंकज स्वामी ने बताया कि वह वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे और बुधवार सुबह तबियत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली। 
देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं में विशेष स्थान रखने वाली पत्रिका ‘पहल’ के संपादक के रूप में काम कर चुके ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवम्बर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला ज़ि‍ले में हुआ था। उनका प्रारम्भिक जीवन महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में व्यतीत हुआ और फिर उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2013 में जबलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें मानद डॉक्टर ऑफ़ लिटरेचर की उपाधि प्रदान की। 
ज्ञानरंजन जबलपुर विश्वविद्यालय से संबंद्ध जीएस कॉलेज में हिन्दी के प्रोफ़ेसर रहे और 34 वर्ष की सेवा के बाद 1996 में सेवानिवृत्त हुए। ज्ञानरंजन के अनेक कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए और अनूठी गद्य रचनाओं की उनकी एक क़िताब कबाड़खाना बहुत लोकप्रिय हुई। उन्हें हिन्दी संस्थान के साहित्य भूषण सम्मान, मध्यप्रदेश साहित्य परिषद के सुभद्रा कुमारी चौहान, मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग के शिखर सम्मान और मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।