सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने घुसपैठियों को लेकर जताई चिंता!इतिहास से सबक लेना जरूरी,जैसे ईरान बदल गया, वैसे ही भारत में खतरा

Senior Supreme Court lawyer expresses concern about infiltrators! It's important to learn from history; just as Iran has changed, so too has the threat in India.

दिल्ली 

 

देश में अवैध घुसपैठ के मुद्दे को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पोस्ट करते हुए कहा कि भारत में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे लोगों का सवाल गंभीर है और इस पर समाज व सरकार दोनों को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

 

अश्विनी उपाध्याय ने अपने बयान में इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि आज जिस देश को ईरान के नाम से जाना जाता है, वह प्राचीन समय में पर्शिया कहलाता था। उनके मुताबिक इतिहास में जनसंख्या के बदलाव ने कई क्षेत्रों की सामाजिक संरचना और पहचान को बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत में भी अवैध घुसपैठ का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है और इस पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।

भारत में अवैध प्रवासियों की सटीक संख्या को लेकर कोई आधिकारिक और अंतिम आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन समय-समय पर विभिन्न सरकारी और सुरक्षा एजेंसियों के अनुमान सामने आते रहे हैं। केंद्र सरकार के पूर्व आकलनों में देश में बड़ी संख्या में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का जिक्र किया गया है। कुछ पुराने सरकारी अनुमानों में करीब दो करोड़ तक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के भारत में रहने की आशंका जताई गई थी। वहीं अलग-अलग राजनीतिक और सुरक्षा विश्लेषणों में यह संख्या इससे अधिक बताई जाती रही है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

इसके अलावा भारत में म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार हजारों रोहिंग्या शरणार्थी दिल्ली, जम्मू, हैदराबाद और कुछ अन्य शहरों में रह रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर सुरक्षा और मानवीय पहलुओं पर भी बहस होती रही है।

अवैध घुसपैठ का सवाल खासतौर पर सीमावर्ती राज्यों में अधिक उठता रहा है। असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में यह विषय लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का हिस्सा रहा है। केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की बात कहती रही हैं। अवैध प्रवास का मुद्दा केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनसंख्या, संसाधनों पर दबाव और रोजगार जैसे कई सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि जब भी इस विषय पर कोई बयान सामने आता है, तो देशभर में इस पर नई बहस शुरू हो जाती है।