15 साल बाद मिला इंसाफः पुलिस कस्टडी में युवक की मौत के मामले में पूर्व थानेदार समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद! अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

Justice after 15 years: 9 police personnel, including a former Station House Officer, sentenced to life imprisonment for the death of a youth in police custody! Court delivers historic verdict.

नई दिल्ली। करीब 15 वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद महाराष्ट्र के वाशिम जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस कस्टडी में हुई एक युवक की मौत के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन रिसोड़ पुलिस स्टेशन के पूर्व थानेदार सहित नौ पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले को न केवल मृतक के परिवार, बल्कि मानवाधिकार और न्याय व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। यह मामला 10 मई, 2011 का है, जब रिसोड़ थाना क्षेत्र में रहने वाले पारधी समाज के युवक बेग्या पवार को देर रात लगभग तीन बजे पुलिस उसके घर से पूछताछ के नाम पर अपने साथ ले गई थी। पुलिस ने परिजनों को भरोसा दिलाया था कि पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया जाएगा, लेकिन कुछ ही घंटों बाद परिवार को बेटे की मौत की सूचना मिली। आरोप है कि थाने में पुलिसकर्मियों ने बेग्या पवार की बेरहमी से पिटाई की, जिसके चलते उसकी पुलिस हिरासत में ही मौत हो गई।

सबसे अहम बात यह रही कि मृतक के खिलाफ किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। वह एक सामान्य नागरिक था और घटना से महज एक वर्ष पहले ही उसकी शादी हुई थी। बेटे की मौत से टूट चुके बुजुर्ग माता-पिता जब न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उनकी शिकायत तक दर्ज नहीं की गई। जिस थानेदार पर आरोप लगे थे, उसी ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया। इस घटना के बाद पारधी समाज में भारी आक्रोश फैल गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों और समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन और मोर्चे निकालकर निष्पक्ष जांच की मांग की। बाद में जब मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया तो मेडिकल रिपोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता उजागर कर दी। रिपोर्ट में सामने आया कि बेग्या पवार के शरीर की कई हड्डियां टूटी हुई थीं और उसके साथ गंभीर शारीरिक यातना की गई थी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी गई। जांच अधिकारी अनवर शेख ने पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल की। उन्होंने घटनास्थल, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत चार्जशीट तैयार की। चार्जशीट में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि पुलिस हिरासत के दौरान बेग्या पवार के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिसके कारण उसकी मौत हुई। करीब 15 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद वाशिम जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश झपाटे ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर तत्कालीन थानेदार महादेव माणिक धांडे सहित कुल नौ पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। दोषियों में दो पुलिसकर्मी, जिनमें पूर्व थानेदार भी शामिल हैं, इस दौरान सेवानिवृत्त हो चुके हैं। फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद सभी दोषियों को वाशिम जेल भेज दिया गया। औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें अमरावती सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया जाएगा।

फैसले के बाद मृतक की वृद्ध मां कलाबाई नयनु पवार ने भावुक होकर कहा कि उनके बेटे को आखिरकार न्याय मिल गया। उन्होंने न्यायालय, सरकारी वकील और सीआईडी जांच अधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बेटा निर्दोष था और उसे केवल पूछताछ के बहाने घर से ले जाया गया था, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत की खबर मिली। उन्होंने कहा कि न्याय पाने के लिए परिवार ने वर्षों तक संघर्ष किया और अब अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है।