राज्यसभा चुनाव: नाम वापसी का आज आखिरी दिन; कई राज्यों में निर्विरोध जीत तय, तो कहीं 'क्रॉस वोटिंग' का बढ़ा रोमांच
नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर चल रही सियासी जोर-आजमाइश के बीच आज (गुरुवार) का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। नामांकन पत्र वापस लेने की आज अंतिम तारीख है। दोपहर बाद जैसे ही नाम वापसी का समय खत्म होगा, चुनावी रण की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। माना जा रहा है कि आज ही कई सीटों पर उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का औपचारिक ऐलान भी हो जाएगा। जिन सीटों पर एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में डटे रहेंगे, वहां 18 जून को मतदान कराया जाएगा। इस बार का चुनाव इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि इसके नतीजों के बाद सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) उच्च सदन (राज्यसभा) में दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े के और भी करीब पहुंच सकता है। इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, दिग्विजय सिंह, और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू व जॉर्ज कुरियन जैसे दिग्गजों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे कई सीटों पर प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। कुल 24 सीटों के लिए इस समय 26 उम्मीदवार मैदान में हैं।
चुनाव में सबसे ज्यादा दिलचस्प मुकाबला मध्य प्रदेश और झारखंड में देखने को मिल रहा है, जहां अतिरिक्त उम्मीदवारों के मैदान में होने से 'क्रॉस वोटिंग' की सुगबुगाहट तेज हो गई है। झारखंड की 2 सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। लेकिन असली ट्विस्ट वर्तमान सांसद परिमल नथवानी के निर्दलीय नामांकन से आया है, जिन्हें भाजपा का समर्थन हासिल है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और जीत के लिए हर उम्मीदवार को 28 प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। भाजपा और सहयोगियों के पास 24 विधायक हैं। नथवानी को जीतने के लिए 3 अतिरिक्त वोटों की दरकार है, जिससे यहां विधायकों के पाला बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं। मध्य प्रदेश की 3 सीटों पर भाजपा ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को उतारा है। कांग्रेस ने पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उनका नामांकन रद्द होने के बाद से राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 228 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। जीत के लिए प्रति उम्मीदवार 58 वोट चाहिए। भाजपा दो सीटें आसानी से जीत रही है, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसके पास 10 वोट कम हैं। उधर कांग्रेस की प्रभावी संख्या भी कम हुई है। भाजपा को भरोसा है कि वह रणनीतिक मैनेजमेंट या क्रॉस वोटिंग के सहारे तीसरी सीट भी झटक लेगी। कई राज्यों में सीटों के समीकरण ऐसे हैं जहां विपक्ष ने उम्मीदवार ही नहीं उतारे हैं, जिससे वहां सत्तारूढ़ दलों की जीत तय है। भाजपा के राजूभाई शुक्ला, मुकेश राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र कंजारिया मैदान में हैं। 182 सदस्यीय सदन में भाजपा के 161 विधायक होने और विपक्ष का कोई उम्मीदवार न होने से चारों की निर्विरोध जीत पक्की है। टीडीपी के सना सतीश बाबू, बाश्यम रामकृष्ण, चिंतकायला विजय और जनसेना के लिंगमनेनी रमेश की जीत एनडीए के भारी बहुमत के कारण बेहद आसान है। उत्तर-पूर्व के राज्य: मणिपुर से भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष अधीकारिमयुम शारदा देवी, अरुणाचल से ताई तागक, मेघालय से एनपीपी के जेम्स के. संगमा और मिजोरम से जेडपीएम के के. लालत्लुआंगकिमा का चुना जाना लगभग तय है। कर्नाटक की 4 सीटों के लिए कांग्रेस ने मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उतारा है, जबकि भाजपा की ओर से एम. नागराजा मैदान में हैं। यहाँ कांग्रेस ने भाजपा पर पूर्व पीएम देवगौड़ा को टिकट न देने का सियासी आरोप लगाकर माहौल गरमा दिया है। वहीं, राजस्थान की 3 सीटों पर कांग्रेस के नीरज डांगी के सामने भाजपा ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उतारकर मुकाबले को जीवंत रखा है। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक सीट के उपचुनाव पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आज शाम तक यह साफ हो जाएगा कि 18 जून को किन-किन सीटों पर असली 'बैटल' देखने को मिलेगा।