दिल्ली प्रदर्शन में जाने से पहले उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी अध्यक्ष को हिरासत में लेने का मामला! हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि प्रभात ध्यानी को पुलिस और रेलवे पुलिस ने बिना पूर्व सूचना के हिरासत में लिया था। न तो उनके परिवार को इसकी जानकारी दी गई और न ही उनकी पार्टी के किसी पदाधिकारी को सूचित किया गया। काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चलने पर उनके एक करीबी सहयोगी ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की। मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे। मंगलवार को राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में जवाब प्रस्तुत किया गया। सरकार ने बताया कि प्रभात ध्यानी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 172 के तहत कार्रवाई की गई थी। साथ ही यह भी कहा गया कि नई दिल्ली में चल रहे सीजीपी और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने विभिन्न राज्यों को सतर्कता बरतने और प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों पर आवश्यक कार्रवाई करने संबंधी निर्देश जारी किए थे। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि यदि किसी व्यक्ति पर केवल संभावित रूप से प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका हो, तो क्या उसे इस आधार पर हिरासत में लिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र रूप से आने-जाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेना भी संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है। ऐसे में किसी व्यक्ति को बिना पर्याप्त कानूनी आधार के हिरासत में लेने का औचित्य क्या है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि किसी राजनीतिक दल के अध्यक्ष को इस तरह अवैध रूप से हिरासत में लिया जाता है तो पुलिस प्रशासन और सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। याचिका में मुआवजे की भी मांग की गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में विस्तृत काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं याचिकाकर्ता को भी अपना प्रत्युत्तर (रिजॉइंडर) दाखिल करने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी।