सियासी केमिस्ट्रीः विधायक आवास पर सीएम की दस्तक! सियासत की नाव में साथ-साथ दिखे मुख्यमंत्री धामी और पांडे, तो क्या मिटने लगी दूरियां?

Political Chemistry: CM visits MLA's residence! Chief Minister Dhami and Pandey seen together in the same political boat—is the distance between them narrowing?

रुद्रपुर। उत्तराखण्ड की राजनीति में शनिवार का दिन केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सत्ता के गलियारों में कई नए सवाल भी खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गदरपुर पहुंचना, विधायक अरविंद पांडे के आवास पर जाना, उनके साथ बोटिंग करना और सार्वजनिक रूप से सहज नजर आना, राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

गौरतलब है कि बीते दो वर्षों से उत्तराखण्ड भाजपा की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के बीच संबंधों को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद अरविंद पांडे कई बार सार्वजनिक मंचों से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। संगठन और सरकार के कई फैसलों को लेकर उनकी असहमति भी समय-समय पर सामने आती रही है। ऐसे में शनिवार को दोनों नेताओं का एक साथ दिखाई देना केवल औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा।

दरअसल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गदरपुर स्थित हरीपुरा बौर जलाशय में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्याकिंग एवं कैनोइंग प्रतियोगिता की तैयारियों का निरीक्षण करने पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम की सबसे अहम और चर्चित तब सामने आई जब मुख्यमंत्री सीधे विधायक अरविंद पांडे के आवास पर पहुंचे। इसके बाद दोनों नेताओं ने एक साथ हाई स्पीड मोटरबोटिंग का आनंद लिया। यह तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गईं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से संगठनात्मक मजबूती पर काम कर रही है। यूं तो उत्तराखण्ड प्रदेश में व्यक्तिगत समीकरण और क्षेत्रीय नेतृत्व का प्रभाव काफी अहम माना जाता है। तराई क्षेत्र विशेषकर ऊधम सिंह नगर जिले में अरविंद पांडे का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में यदि पार्टी के भीतर किसी प्रकार की दूरी या असंतोष की धारणा बनी रहती है तो उसका असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री धामी और अरविंद पांडे की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं मानी जा रही।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व राज्य में किसी भी प्रकार के गुटीय संदेश को समाप्त करना चाहता है। 2027 का चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लड़ा जाना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में संगठन चाहता है कि सभी बड़े नेता एकजुट होकर चुनावी तैयारी में जुटें। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा नेतृत्व की रणनीतिक कवायद भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी हाईकमान आगामी चुनावों से पहले किसी भी संभावित असंतोष को खत्म करने के पक्ष में है। ऐसे में धामी और पांडे की सार्वजनिक नजदीकी का संदेश कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना भी इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उद्देश्य हो सकता है। दूसरी ओर विपक्ष भी लंबे समय से भाजपा के भीतर कथित अंतर्कलह और नेताओं की नाराजगी को मुद्दा बनाता रहा है।

अरविंद पांडे से जुड़े विवाद, जमीन प्रकरण, भू-माफिया संबंधी आरोप और उनके परिवार को लेकर उठे सवालों पर कांग्रेस लगातार भाजपा को घेरती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उनके आवास पहुंचना और साथ में समय बिताना यह भी दर्शाता है कि पार्टी अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी है। हालांकि भाजपा के नेताओं का कहना है कि इस मुलाकात को अनावश्यक राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री सरकारी कार्यक्रम के सिलसिले में गदरपुर आए थे और क्षेत्र के विधायक होने के नाते अरविंद पांडे का उनके साथ होना स्वाभाविक है। लेकिन राजनीति में संदेश अक्सर शब्दों से ज्यादा तस्वीरें देती हैं और शनिवार को सामने आई तस्वीरों ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम था, या फिर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के भीतर एकता का बड़ा प्रदर्शन? क्या मुख्यमंत्री धामी और अरविंद पांडे के बीच चली आ रही दूरी वास्तव में खत्म हो गई है, या फिर यह भाजपा हाईकमान की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत चुनाव से पहले सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है? फिलहाल इतना तय है कि हरीपुरा बौर जलाशय में हुई यह बोटिंग सिर्फ रोमांच तक सीमित नहीं रही। इसने उत्तराखण्ड की राजनीति में कई नए संकेत छोड़ दिए हैं। आने वाले दिनों में इन संकेतों का वास्तविक अर्थ क्या निकलता है, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर बनी रहेगी।