उत्तराखंडः दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक का मामला! हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 4 सप्ताह में मांगा जवाब, महाधिवक्ता को भी नोटिस
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर पालिका व नगर निगम के क्षेत्रों में वर्ष 2002 के बाद दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ने देने से संबंधित प्रावधान को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से इस मामले में 4 सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के साथ ही महाधिवक्ता को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 4 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। कोर्ट ने महाधिक्वता को इसलिए नोटिस जारी किया है, क्योंकि याचिका में प्रावधान को चुनौती दी गयी है। आज मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। बता दें कि ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा निवासी नईम उल ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सरकार के नगर पालिका व निगम संसोधन एक्ट 2002 के प्रावधान को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि 2002 के बाद जिसके तीन बच्चे होंगे, उसको नगर पालिका या नगर निगम में चुनाव लड़ने नहीं दिया जायेगा। जबकि पंचायतों में यह नियम 27 सितंबर 2009 के बाद से लागू किया गया है। याचिका में कहा गया है कि इससे पहले वो ग्रामीण इलाके में थे और चुनाव लड़ सकते थे, लेकिन अब नगर पालिका और नगर निगम का परिसीमान होने के बाद उनके गांव, नगर पालिका और नगर निगम में विलय हो गए हैं। परिसीमन होने के बाद वो चुनाव लड़ने के लिये अयोग्य हो गये हैं और चुनाव लड़ने के लिये उनको अयोग्य घोषित करना उनके खिलाफ अन्याय है। इसलिए इसपर रोक लगाई जाए। क्योंकि नगर निकायों का विस्तार ग्राम पंचायतों से ही होता है। राज्य में इस तरह के दो कानून एक साथ लगाना नागरिकों को संविधान में दिए गए प्राविधानों के खिलाफ व उनके अधिकारों का हनन है। इसलिए याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गयी है कि यह कट आफ डेट 2009 से लागू की जाए, ताकि वे नगरीय क्षेत्रों में चुनाव लड़ सके। क्योंकि पंचायती क्षेत्रों के कई ग्रामों का विलय नगरीय क्षेत्रों में परिसिमन के बाद हुआ। वहां उन्होंने चुनाव लड़ा, यहां उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंधित किया जा रहा है।