दिल्ली में हाईवोल्टेज ड्रामा: राहुल गांधी के नेतृत्व में गांधी स्मृति पहुंचे विपक्षी सांसद! जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बैन, मुरली मनोहर जोशी बोले- छात्राओं पर बल प्रयोग पीड़ादायक
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है और अब इसका असर देश के कई बड़े शहरों में भी दिखाई देने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोजगारी और भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 20 जुलाई को आयोजित 'चलो पार्लियामेंट' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस की बैरिकेडिंग के बावजूद संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान झड़प की स्थिति बनी और कई प्रदर्शनकारियों तथा पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। दिल्ली से शुरू हुआ यह आंदोलन अब मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता सहित अन्य बड़े शहरों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर प्रभावी कार्रवाई और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। CJP की ओर से आंदोलन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की बात कही गई है।
इधर आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के कई विपक्षी दलों ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसद गांधी स्मारक की ओर बढ़े। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र सड़कों पर हैं, इसलिए विपक्षी सांसदों ने भी उनके समर्थन में सड़क पर उतरने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद इंडिया गेट जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद गांधी स्मृति जाने की कोशिश के दौरान भी बस को रोके जाने की बात राहुल गांधी ने कही। उन्होंने कहा कि छात्रों तक विपक्ष का संदेश स्पष्ट है कि वे उनके साथ खड़े हैं। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए गृह मंत्रालय की ओर से मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को लेकर भी प्रतिबंध की जानकारी सामने आई है। बताया गया कि जंतर-मंतर के करीब डेढ़ किलोमीटर के दायरे में शाम चार बजे से आधी रात तक मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित रहेंगी।
इस बीच भाजपा मार्गदर्शक मंडल के सदस्य और पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने भी आंदोलन को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवा कई दिनों से नई दिल्ली की सड़कों पर हैं और उनकी चिंताएं वास्तविक हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं का समाधान सहानुभूति और दूरगामी सोच के साथ किया जाना चाहिए। जोशी ने पूरे मामले को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर बलपूर्वक निपटाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान निकालने की जरूरत बताई। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं और युवतियों पर कथित बल प्रयोग को लेकर भी चिंता जताई। छात्र आंदोलन के बढ़ते दायरे और विपक्ष के समर्थन के बीच अब सरकार पर भी बातचीत के जरिए गतिरोध समाप्त करने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।