ज़िंदगी से खिलवाड़:यूपी में नकली दवाओं का करोड़ों का काला कारोबार बेनकाब! रद्द लाइसेंस पर हो रही फर्जी बिलिंग,लखनऊ से गोरखपुर तक फैला नेटवर्क

Playing with lives: Multi-crore illicit trade in spurious medicines exposed in UP! Fake billing taking place using cancelled licenses; network spans from Lucknow to Gorakhpur.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं के कारोबार का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह फर्जी ट्रेडिंग और नकली दवाओं की सप्लाई के लिए उन मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस का इस्तेमाल कर रहा था, जिनके लाइसेंस किसी कारणवश रद्द हो चुके थे। इसके बदले ऐसे दुकानदारों को दो से आठ प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था। यह नेटवर्क केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रयागराज, आगरा, गोरखपुर, कानपुर समेत कई शहरों तक फैला हुआ है। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पूरे मामले की व्यापक जांच शुरू कर दी है।

एफएसडीए की जांच में सामने आया कि नकली दवा कारोबारी फर्जी बिलिंग और सप्लाई के लिए ऐसे मेडिकल स्टोरों को निशाना बनाते थे, जिनकी बिक्री कम थी या जिनके लाइसेंस निरस्त हो चुके थे। रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के शिव शक्ति मेडिकल स्टोर के संचालक कपिल जायसवाल का लाइसेंस 5 जनवरी को रद्द हो गया था, लेकिन इसके बावजूद उसके लाइसेंस नंबर पर अमीनाबाद स्थित विद्या फार्मा के संचालक प्रियांशु और सुधांशु दवाओं की आपूर्ति करते रहे। इस फर्जी कारोबार के एवज में कपिल जायसवाल को तीन से आठ प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था, जबकि नकली दवाओं की ढुलाई करने वाले हरमीत और साहिल को दो प्रतिशत कमीशन मिलता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए ब्लड प्रेशर की दवाओं टेल्मा एएम और टेल्मा एच के कई बैच नंबर फर्जी बिलिंग में इस्तेमाल किए गए। अधिकारियों को आशंका है कि इन्हीं बैच नंबरों के नाम पर बड़ी मात्रा में नकली दवाएं बाजार में पहुंचाई गई हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। एफएसडीए को यह भी जानकारी मिली है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से बड़ी मात्रा में नकली दवाएं उत्तर प्रदेश लाई गईं और अलग-अलग शहरों में उनकी पैकिंग कर बाजार में सप्लाई की गई। मेरठ के खरदौनी क्षेत्र में छापेमारी के दौरान दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीन भी बरामद की गई, जिससे इस संगठित नेटवर्क की पुष्टि हुई। जांच के दौरान उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित आरएस ग्लोबल फार्मा से कथित सांठगांठ के जरिए फैटी लिवर की दवा इवियन 400 तैयार किए जाने के सुराग मिले। इसके आधार पर बागपत स्थित प्रेस्कॉट फार्मा जेल प्राइवेट लिमिटेड की जांच की गई, जहां बिना पैकिंग वाली विटामिन-ई बरामद हुई। आरोप है कि यहां अवैध रूप से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर दवा को बाजार में बेचा जा रहा था। एफएसडीए अधिकारियों का कहना है कि मामले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जिन शहरों में फर्जी बिलिंग और नकली दवाओं की सप्लाई के सबूत मिले हैं, वहां भी जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि लाखों लोगों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।