उत्तराखंड में बड़ा खेला होबे: तो क्या बिना पीसीबी की अनुमति के सरकार ने स्टोन क्रशर संचालन को दिखाई हरी झण्डी! लिंक में पढ़ें मेहरबान सरकार से हाईकोर्ट का सवाल
उत्तराखंड हाइकोर्ट ने रामनगर के सक्खनपुर में स्थित मनराल स्टोन क्रशर के अवैध रूप से संचालित होने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद अगले बुद्धवार को सैकेट्री इंडस्ट्रियल डेवलेपमेन्ट को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि स्टोन क्रेशर लगाने हेतु पीसीबी की अनुमति से पहले सरकार ने कैसे अनुमति दे दी? किन नियमों के तहत अनुमति दी? जबकि पहले अनुमति पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से लेनी थी। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 20 अप्रैल की तिथि नियत की है।
पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि क्या राज्य में स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति देने से पूर्व साइलेंट जोन, इंडस्ट्रियल ज़ोन, और रेजिडेंशियल जोन का निर्धारण किया गया था या नही? पूर्व में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया था कि राज्य को बने हुए 21 साल हो गए है अभी तक यह स्पष्ट नही हो पाया कि कौन सा क्षेत्र रेजीडेंशियल है कौन सा क्षेत्र इंडस्ट्रियल और कौन सा क्षेत्र साइलेंट ज़ोन है? जहां मर्जी हो वहाँ स्टोन क्रशर खोले जाने के अनुमति दी जा रही है। जबकि हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा था कि न्यायलय के आदेश के बिना स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति नही दी जाय। उसके बाद भी पीसीबी व सरकार ने पुरानी तिथि से इसे लगाने की अनुमति दे दी गयी। यह स्टोन क्रशर आबादी क्षेत्र में लगाया गया है।
रामनगर निवासी आनन्द सिंह नेगी ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि कार्बेट नेशनल पार्क के समीप सक्खनपुर में मनराल स्टोन क्रेशर अवैध रूप से चल रहा है। स्टोन क्रेशर के पास पीसीबी का लाइसेंस नही है। स्टोन क्रेशर कार्बेट नेशनल पार्क के समीप लगाया है। याचिकाकर्ता का ये भी कहना है उत्तराखंड में अभी तक राज्य सरकार द्वारा राज्य में साइलेंट ज़ोन, इंडस्ट्रियल ज़ोन और रेजिडेंशियल ज़ोन का निर्धारण नही किया है बावजूद इसके किसी भी जगह स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति दे दी जाती है, लिहाजा इन स्टोन क्रशरों को बंद किया जाए।