मई में 'अक्टूबर' जैसी ठंडक: पहाड़ से मैदान तक लुढ़का पारा, मौसम के बदलते पैटर्न ने भीषण गर्मी को दी मात

October-like' Chill in May: Mercury Drops from the Hills to the Plains; Changing Weather Patterns Defeat the Scorching Heat.

देहरादून। आमतौर पर मई का महीना भीषण गर्मी और लू के लिए जाना जाता है, लेकिन इस साल मौसम के मिजाज ने सबको हैरान कर दिया है। उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर बारिश, पहाड़ों पर बर्फबारी और तेज हवाओं ने वातावरण में ऐसी ठंडक घोल दी है कि लोगों को मई में 'अक्टूबर' जैसी गुलाबी ठंड का एहसास हो रहा है। दिन भर आसमान में बादलों की आवाजाही और सूर्य की तपिश कम होने से फिलहाल प्रचंड गर्मी से बड़ी राहत मिली है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से मौसम के पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ की अत्यधिक सक्रियता और बदलता जलवायु पैटर्न है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लगातार दूसरा साल है जब मई की शुरुआत में गर्मी का असर उम्मीद से काफी कम रहा है। बीते वर्ष भी मई के शुरुआती पखवाड़े में बारिश और तेज हवाओं ने तापमान को बढ़ने नहीं दिया था, और इस बार भी वही स्थिति बनी हुई है। तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में पारा सामान्य से काफी नीचे रिकॉर्ड किया गया है।  राजधानी दून में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 डिग्री नीचे गिरकर 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पहाड़ों में पारा सामान्य से काफी कम बना हुआ है, जिससे सुबह और शाम हल्की जैकेट की जरूरत महसूस हो रही है। हालांकि, बादलों की मौजूदगी के कारण रात का न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री बढ़कर 23.0 डिग्री पर रहा। मौसम विभाग ने राहत भरी खबर देते हुए बताया है कि आने वाले दिनों में भी मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट दर्ज की जा सकती है। मैदानी इलाकों में तेज हवाओं और छिटपुट बारिश की संभावना है, जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। मई के महीने में जहां कूलर और एसी की मांग चरम पर होती है, वहीं इस बार लोग पंखों की धीमी रफ्तार में ही सुकून महसूस कर रहे हैं। सुबह और शाम के वक्त महसूस होने वाली हल्की ठंड ने लोगों को घरों से बाहर निकलने और खुशनुमा मौसम का आनंद लेने का मौका दिया है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसे ग्लोबल वार्मिंग और बदलते परिवेश की दृष्टि से चिंताजनक भी बताया है।