नई बहसः क्या है UGC? जिसको लेकर देश भर में मचा है बवाल! सोशल मीडिया पर भी छिड़ा घमासान, लिंक में जानें यूजीसी और उसका नया रेगुलेशन?

New debate: What is UGC? It's causing a nationwide uproar! A debate has also erupted on social media. Learn more about UGC and its new regulations in the link below.

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक नए नियम को लेकर इन दिनों देशभर में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ को लेकर जहां एक तरफ इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में इसका तीखा विरोध भी शुरू हो गया है। खासकर अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों और प्रभावशाली धार्मिक व सामाजिक नेताओं ने इस नियम को लेकर सवाल खड़े किए हैं। 

क्या है यूजीसी और उसका नया रेगुलेशन?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है। इसी आयोग ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है। 

नए कानून में क्या बदला है?
अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से एससी और एसटी समुदाय तक सीमित मानी जाती थीं। नए रेगुलेशन के तहत ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे।

हर संस्थान में क्या-क्या करना होगा अनिवार्य?
नए नियमों के अनुसार हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में अब एससी, एसटी और ओबीसी के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ बनाना अनिवार्य होगा। यूनिवर्सिटी लेवल पर एक समानता समिति गठित की जाएगी। इस समिति में ओबीसी, महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी होगी। समिति हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को भेजेगी। यूजीसी का कहना है कि इससे शिकायतों की निगरानी, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।

विरोध क्यों कर रही हैं अगड़ी जातियों से जुड़ी संस्थाएं?
रेगुलेशन लागू होते ही देश के कई हिस्सों में अगड़ी जातियों से जुड़े संगठनों में असंतोष देखने को मिला। विरोध करने वालों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसके जरिए अगड़ी जातियों के छात्रों और शिक्षकों को झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है। जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर ‘सवर्ण समाज समन्वय समिति (एस-4) बनाई है, ताकि इस नियम के खिलाफ संगठित आंदोलन किया जा सके।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
इस रेगुलेशन को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त बहस चल रही है। अगड़ी जातियों से जुड़े कई यूट्यूबर, इंफ्लुएंसर और एक्टिविस्ट इसे सवर्ण विरोधी कानून बता रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप के एक वीडियो में सवर्ण समाज से एकजुट होने की अपील के बाद बहस और तेज हो गई। वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय समर्थक इसे बराबरी और सम्मान की दिशा में जरूरी सुधार बता रहे हैं।