नारी शक्ति वंदन अधिनियम: भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला, नीति निर्माण में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी
देहरादून | दून मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में महिलाओं के सशक्तिकरण और राजनीति में उनकी बढ़ती भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने हुंकार भरते हुए कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने इसे महिला आत्मविश्वास और सम्मान की नई ऊंचाई करार दिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि जिस ऐतिहासिक कानून का देश को दशकों से इंतजार था, उसे मोदी सरकार ने हकीकत में बदला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 2014 के बाद से केंद्र सरकार की हर योजना और नीति के केंद्र में महिलाएं रही हैं। अब महिलाएं केवल मतदान करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि देश के नीति निर्माण (पॉलिसी मेकिंग) में भी सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाएंगी। सावित्री ठाकुर ने भावुक होते हुए अपना उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा, "मैं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हूं कि जब अवसर मिलता है, तो एक साधारण व्यक्तित्व भी मजबूती से शीर्ष तक पहुंच सकता है।" उन्होंने विश्वास दिलाया कि यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की आवाज को और अधिक सशक्त बनाएगा। इससे न केवल महिलाओं बल्कि बच्चों और समाज के हर वंचित वर्ग की समस्याओं को मंच मिलेगा। राज्यमंत्री ने कहा कि यह कानून आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बताया। सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे विधायी निकायों में महिलाओं की उपस्थिति से सामाजिक मुद्दों पर अधिक संवेदनशील और प्रभावी कानून बन सकेंगे।