नैनीताल:मैदान सुधारने निकले थे, तालाब बना बैठे!करोड़ों से संवारा था डीएसए मैदान, पहली बारिश में बना तालाब! डीएम ने दिए जांच के निर्देश
नैनीताल में करोड़ों रुपये की लागत से हुए फ्लैट्स मैदान के सौंदर्यीकरण और समतलीकरण कार्य पर पहली ही तेज बारिश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को हुई बारिश के बाद मल्लीताल स्थित फ्लैट्स मैदान के कई हिस्सों में पानी भर गया और मैदान तालाब जैसा दिखाई देने लगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जांच के निर्देश दिए हैं।
नैनीताल का फ्लैट्स मैदान शहर का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान होने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों का भी मुख्य केंद्र है। यहां खेल प्रतियोगिताओं के अलावा मेले, प्रदर्शनी, कार्निवाल, ईद की नमाज और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

फाइल फोटो
वर्ष 2025 में मैदान के सौंदर्यीकरण, समतलीकरण और सुधार कार्य के लिए करीब छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद मैदान और पवेलियन भवन में व्यापक निर्माण कार्य कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्रिटिश काल से मैदान में प्राकृतिक ढलान थी, जिससे बरसात का पानी स्वतः निकल जाता था। लेकिन हालिया निर्माण कार्य के दौरान मैदान को पूरी तरह समतल कर दिया गया, जिससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई।

सोमवार को हुई बारिश के बाद मैदान के कई हिस्सों में पानी जमा हो गया। इसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी खामियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पहली ही बारिश में जलभराव की स्थिति बन रही है तो निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

राम सेवक सभा के अध्यक्ष एवं पूर्व हॉकी खिलाड़ी मनोज साह 'मनदा' ने कहा कि पहले मैदान में मौजूद प्राकृतिक ढलान के कारण पानी आसानी से निकल जाता था। अब ढलान समाप्त होने से पानी मैदान में रुकने लगा है। उन्होंने कहा कि पहले केवल एक रेक लगाने से पानी निकल जाता था, जबकि अब मैदान में तालाब जैसी स्थिति बन रही है।

वहीं अब इस मामले में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बताया कि पहली बारिश में मैदान में जलभराव की सूचना मिली है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करने और जल निकासी व्यवस्था में किसी प्रकार की कमी पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
पहली ही बारिश में मैदान में हुए जलभराव के बाद शहर में करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता को लेकर शहरभर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि वर्षों पुरानी प्राकृतिक व्यवस्था को बदलकर नई व्यवस्था बनाई गई है तो उसका परिणाम भी बेहतर दिखाई देना चाहिए था। अब जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि जलभराव का कारण तकनीकी खामी है या निर्माण कार्य में कोई लापरवाही।