नैनीताल HC: सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी! अतिथि संकाय को अलग-थलग करना ‘भेदभावपूर्ण और प्रतिशोधात्मक’

Nainital HC: High Court makes strong remarks in Soban Singh Jeena University case! Isolation of guest faculty is 'discriminatory and vindictive'

नैनीताल | उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता को अतिथि संकाय के रूप में पुनर्नियुक्ति से वंचित करना prima facie भेदभावपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक प्रतीत होता है। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने डब्ल्यूपीएसबी संख्या 300/2025 (प्रियंका बनाम रजिस्ट्रार, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय एवं अन्य) की सुनवाई के दौरान की। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रियंका वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वयं उपस्थित हुईं, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता सी.एस. रावत और अन्य पक्षकारों की ओर से अधिवक्ता योगेश कुमार पचोलिया ने पक्ष रखा। अदालत ने पाया कि विधि संकाय के विभागाध्यक्ष द्वारा याचिकाकर्ता को अलग-थलग करना और उन्हें अतिथि संकाय के रूप में पुनः नियुक्त करने से इनकार करना न्यायसंगत नहीं है।

सुनवाई में यह तथ्य भी सामने आया कि याचिकाकर्ता ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ एक शिकायत में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष गवाही दी थी, जिसमें समिति की रिपोर्ट विभागाध्यक्ष के विरुद्ध गई है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन, विशेष रूप से कुलपति, द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने यह भी गंभीरता से लिया कि पूर्व में पारित न्यायालय के आदेशों के बावजूद विभागाध्यक्ष द्वारा उनका पालन नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, पहले याचिकाकर्ता को कार्यभार ग्रहण करने से रोका गया और बाद में उनकी उपस्थिति पर सवाल उठाकर वजीफा एवं पारिश्रमिक का भुगतान भी रोक दिया गया, जो prima facie मनगढ़ंत कारणों पर आधारित प्रतीत होता है। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए दो दिन का समय मांगा और न्यायालय को आश्वासन दिया कि पूर्व आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल 2026 के लिए निर्धारित की है।