नैनीताल ब्रेकिंग: दुष्कर्म के आरोपी नरेश पांडे मामले में बड़ी खबर! अब दूसरी पीड़िता के मामले में भी नरेश पांडे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
नैनीताल। भवाली के चर्चित व्यापारी नरेश पांडे से जुड़े बहुचर्चित मामले में शनिवार (18 जुलाई 2026) को अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया। दूसरी पीड़िता की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो)/अपर सत्र न्यायालय, नैनीताल ने नरेश पांडे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। इससे पहले नरेश पांडे पहली शिकायतकर्ता की एफआईआर के मामले में भी न्यायिक हिरासत में चल रहे थे।
मामले की सुनवाई के दौरान जेल से नरेश पांडे को कोर्ट में तलब किया गया। विवेचना अधिकारी की ओर से न्यायिक रिमांड की मांग की गई, जिस पर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच विस्तृत बहस हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए नरेश पांडे को दूसरी एफआईआर में भी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
मल्लीताल थाना में 12 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर में दूसरी पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2025 में डीएसबी कॉलेज में प्रवेश के दौरान उसकी मुलाकात पहली शिकायतकर्ता युवती से हुई थी। युवती ने स्वयं को कॉलेज से जुड़ा पदाधिकारी बताते हुए प्रवेश में मदद की और बाद में उससे लगातार संपर्क बनाए रखा।
एफआईआर के अनुसार, 4 अक्टूबर 2025 को पहली शिकायतकर्ता उसे एक परिचित से मिलवाने के बहाने हल्द्वानी के एक होटल में ले गई, जहां नरेश पांडे पहले से मौजूद थे। पीड़िता का आरोप है कि वहां उस पर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया। विरोध करने के बावजूद उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि घटना के दौरान पहली शिकायतकर्ता ने फोटो और वीडियो भी बनाए।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि घटना के बाद उसे लालच दिया गया कि इस काम के बदले धनराशि और महंगे उपहार मिलेंगे। साथ ही उसे यह भी बताया गया कि अन्य युवतियां भी इस तरह के कृत्यों में शामिल रही हैं। पीड़िता का कहना है कि इस घटना के बाद वह भयभीत हो गई और अपनी पढ़ाई छोड़कर गांव लौट गई। शिकायत के अनुसार घटना के समय उसकी आयु 17 वर्ष थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी जनपद नैनीताल एवम् विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो सुशील कुमार शर्मा द्वारा दलील दी गई कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। उसने स्वयं मल्लीताल थाना पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई, जांच अधिकारी के समक्ष बयान दिए और मजिस्ट्रेट के सामने भी अपने बयान दर्ज कराए।
अभियोजन के अनुसार, एफआईआर दर्ज कराने में हुई देरी का कारण पीड़िता ने लगातार मिल रही धमकियों को बताया। कोर्ट में कहा गया कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि नरेश पांडे ने उसे हथियार दिखाकर डराया था, जबकि पहली शिकायतकर्ता युवती ने भी उसे लगातार धमकाया। जब पहली शिकायतकर्ता ने नरेश पांडे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, तब पीड़िता को आगे आने का साहस मिला और उसने अपनी शिकायत दर्ज कराई।
अभियोजन ने यह भी कहा कि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण उसकी सहमति से कराया गया, जिसकी रिपोर्ट भी विवेचना का हिस्सा है। इन तथ्यों के आधार पर अभियोजन ने नरेश पांडे को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की।
वहीं, बचाव पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि वर्तमान मुकदमा केवल नरेश पांडे को परेशान करने और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से दर्ज कराया गया है। नरेश पांडे ने भी कोर्ट में कहा कि वह सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति हैं और भविष्य में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उनके अनुसार राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो)/अपर सत्र न्यायालय ने मामले में प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री को देखते हुए नरेश पांडे को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।