नैनीताल:आवाज़ इंडिया ने उठाया मुद्दा, कुमाऊं विवि में शुरू हुई छात्र की उत्तरपुस्तिका की खोज, अन्य समाचारों के फॉलोअप में बिना छात्र से पुष्टि के ‘कॉपी मिलने’ की खबर पर छात्र का खंडन“मुझे न उत्तरपुस्तिका मिली,न सूचना
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय में एमजेएमसी चतुर्थ सेमेस्टर के एक छात्र की उत्तरपुस्तिका से जुड़े मामले में आवाज़ इंडिया की खबर के बाद विश्वविद्यालय में हलचल तेज हुई। छात्र ने RTI के माध्यम से अपने दो विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी थी, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से उसे उत्तरपुस्तिका उपलब्ध कराने के बजाय पहले “उपस्थिति/जांच पत्र” उपलब्ध कराने को कहा गया था। आवाज़ इंडिया ने विश्वविद्यालय के इस जवाब को दस्तावेजों के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
खबर सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा और RTI से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। इसी बीच कुछ समाचार पत्रों के माध्यमों में फॉलोअप खबर प्रकाशित हुई, जिसमें छात्र की उत्तरपुस्तिकाएं “सुरक्षित मिल जाने” और उसे उपलब्ध होने की बात कही गई। लेकिन अब संबंधित छात्र ने स्वयं इस खबर का खंडन कर दिया है।

वही इस मामले में छात्र का कहना है कि उसे अभी तक उसकी उत्तरपुस्तिकाएं नहीं मिली हैं और न ही विश्वविद्यालय की ओर से उसे कोई सूचना दी गई है। छात्र के अनुसार विश्वविद्यालय ने उत्तरपुस्तिकाएं ढूंढ ली होंगी, लेकिन उन्हें छात्र को उपलब्ध कराया जाना अलग बात है। फिलहाल उसके पास न तो दोनों उत्तरपुस्तिकाओं की प्रतियां पहुंची हैं और न ही विश्वविद्यालय की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संचार मिला है।
छात्र का कहना है कि समाचार पत्र में उत्तरपुस्तिका उसके पास सुरक्षित पहुंच जाने की प्रकाशित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत है, क्योंकि वास्तविक स्थिति में उसे अब तक कोई उत्तरपुस्तिका प्राप्त नहीं हुई है।

दरअसल, 9 अगस्त 2026 को छात्र ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के ऑनलाइन RTI पोर्टल पर Photo Journalism (6602340001) और The Art and Essentials of Anchoring (6602340002) की उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उसका नाम, रोल नंबर, एनरोलमेंट नंबर, पाठ्यक्रम, सेमेस्टर और परीक्षा वर्ष समेत आवश्यक विवरण दर्ज थे। उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए ₹138 शुल्क भी जमा किया गया था। इसके बाद 5 सितंबर को विश्वविद्यालय की ओर से उसे पत्र भेजकर संबंधित परीक्षा का उपस्थिति/जांच पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया था।

आवाज़ इंडिया ने इसी पत्र को आधार बनाकर विश्वविद्यालय की परीक्षा रिकॉर्ड व्यवस्था और RTI प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए खबर प्रकाशित की थी। खबर के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर रिकॉर्ड तलाशने की प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन रिकॉर्ड में उत्तरपुस्तिका का मिल जाना और वह उत्तरपुस्तिका संबंधित छात्र को वास्तव में मिल जाना दो अलग स्थितियां हैं। मौजूदा स्थिति में छात्र के अनुसार उसे उत्तरपुस्तिका प्राप्त नहीं हुई है।

अब विश्वविद्यालय की ओर से यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि क्या दोनों उत्तरपुस्तिकाएं वास्तव में मिल चुकी हैं, यदि हां तो उन्हें छात्र को कब और किस माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही छात्र को उत्तरपुस्तिका मिलने की बात प्रकाशित करने से पहले संबंधित छात्र से इसकी पुष्टि क्यों नहीं की गई, यह भी पत्रकारिता की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है।
आवाज़ इंडिया की खबर के बाद विश्वविद्यालय में रिकॉर्ड खंगाले जाने की कार्रवाई सामने आई, लेकिन छात्र के ताजा बयान के अनुसार उसे अभी तक अपनी उत्तरपुस्तिकाएं नहीं मिली हैं। लिहाजा “उत्तरपुस्तिका छात्र को सुरक्षित मिल गई” वाली खबर और छात्र के वास्तविक बयान के बीच साफ अंतर दिखाई दे रहा है।