उत्तराखंड में मानसून का तांडव: सड़कें बनीं दरिया,उफनते नालों में जिंदगी दांव पर,10 जिलों में आज स्कूलों की छुट्टी

Monsoon havoc in Uttarakhand: Roads turn into rivers, lives at risk in swollen drains; schools closed in 10 districts today.

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की पहली दस्तक ही आफत बनकर बरसी है। पिछले 24 घंटों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहां मैदानी इलाकों में सड़कें समंदर बन चुकी हैं, वहीं पर्वतीय जिलों में भूस्खलन और उफनते नदी-नालों ने लोगों की सांसें अटका दी हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए 'रेड और ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जिसके बाद देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर में शुक्रवार को कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में एहतियातन अवकाश घोषित कर दिया गया है।

मौसम की सबसे खौफनाक तस्वीर उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड से सामने आ रही है। यहां बड़ासु पट्टी के दूरस्थ गांवों के सामने एक बार फिर 'ब्लैकआउट' जैसी स्थिति पैदा हो गई है। सांकरी-गंगाड़-ओसला मोटर मार्ग पर स्थित हलारा और पूर्ति खड्ड (नाला) में पानी का बहाव इतना तेज है कि गाड़ियां और इंसान पत्तों की तरह बहने की कगार पर हैं।स्थानीय ग्रामीण नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह का कहना है "सालों से हम यहां पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन सिर्फ खोखले आश्वासन देता है। आज एक बाइक को पार कराने के लिए 10-10 लोगों को जान दांव पर लगानी पड़ रही है। पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका गांवों का संपर्क देश-दुनिया से पूरी तरह कटने की कगार पर है। चिंता की बात यह भी है कि इस समय क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी नगदी फसलों का सीजन है। अगर सड़कें बंद रहीं, तो किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुंचेगी। साथ ही, बीमार मरीजों और स्कूली बच्चों के लिए आपातकालीन रास्ते बंद हो चुके हैं। मामले पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा, "पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को तत्काल सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने और आपदा मद से वैकल्पिक मार्ग तैयार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।"

मैदानी इलाकों में बारिश ने भारी तबाही मचाई है। प्रदेश में पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 206 मिमी वर्षा ऊधमसिंह नगर के काशीपुर में दर्ज की गई। हरिद्वार के रुड़की और काशीपुर के रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने से बाढ़ जैसे हालात हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण राज्य के अधिकतम तापमान में 4 से 8 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है। नैनीताल झील का जलस्तर खतरे के करीब पहुंचने के कारण वहां नौकायन (बोटिंग) पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पहाड़ों में भूस्खलन के कारण वर्तमान में 107 संपर्क मार्ग अवरुद्ध हैं। चमोली में बदरीनाथ हाईवे भनेरपानी के पास भारी मलबे के कारण करीब साढ़े तीन घंटे बंद रहा। कुमाऊं में स्थिति और भी गंभीर है; वहां कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर चंपा मंदिर के पास विशाल चट्टानें खिसकने से चीन सीमा से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ऊधमसिंह नगर को छोड़कर कुमाऊं के 5 जिलों में 54 सड़कें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। उधर, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, गंगा, काली और सरयू जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, हालांकि अभी ये खतरे के निशान से नीचे हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत में रेड अलर्ट, जबकि देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जनता से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मौसम में पहाड़ी और भूस्खलन वाले क्षेत्रों में जाने से पूरी तरह परहेज करें और सुरक्षित स्थानों पर रहें।