अन्नदाता की बदहाली पर विधायक बेहड़ के बिगड़े बोल! ऐसे अधिकारियों को जूता पहनकर घुमाना चाहिए,सरकार को भी लिया आड़े हाथों

MLA Behad lashes out over the plight of farmers! "Such officials should be paraded around in shoes"—he also took the government to task.

किच्छा। उत्तराखंड के किच्छा में स्थित अनाज मंडी उस समय सियासी अखाड़ा बन गई, जब क्षेत्रीय विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिलक राज बेहड़ ने गेहूं खरीद की बदहाली पर अपना आपा खो दिया। निरीक्षण के दौरान अव्यवस्थाओं को देखकर विधायक इस कदर भड़क उठे कि उन्होंने अधिकारियों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कर डाली। विधायक ने विवादित बयान देते हुए कहा, "ऐसे लापरवाह अधिकारियों को जूता पहनकर घुमाना चाहिए।" उनके इस तीखे तेवर के बाद मंडी परिसर में हड़कंप मच गया।

पिछले कई दिनों से किच्छा मंडी में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार और तौल न होने से किसान परेशान थे। किसानों का आरोप था कि क्रय केंद्रों पर उनकी फसल हफ्तों से पड़ी है, लेकिन अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे। इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए विधायक तिलक राज बेहड़ अचानक मंडी के औचक निरीक्षण पर पहुंच गए। मौके पर जब उन्होंने देखा कि किसान अपनी उपज के साथ चिलचिलाती धूप में खड़े हैं और केंद्र पर अव्यवस्था का बोलबाला है, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। विधायक ने क्रय केंद्र के अधिकारियों को मौके पर ही जमकर लताड़ा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की सुस्ती के कारण अन्नदाता परेशान है और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। विवादित बयान के बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। विधायक के समर्थन में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और आक्रोशित किसान भी वहां पहुंच गए और सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विधायक बेहड़ वहीं जमीन पर धरने पर बैठ गए। उन्होंने मांग की कि जब तक जिले के उच्च अधिकारी मौके पर आकर व्यवस्था सुधारने का ठोस आश्वासन नहीं देते, वे वहां से नहीं उठेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी, "किसानों के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह व्यवस्था किसानों के हित में नहीं, बल्कि उनका शोषण करने वाली है। धरने के दौरान विधायक ने राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों में किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें सहूलियत देने के दावे करती है, लेकिन किच्छा मंडी के जमीनी हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं। मंडी में बढ़ते आक्रोश और विधायक के धरने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। आनन-फानन में पुलिस और तहसील प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए। खबर लिखे जाने तक मंडी में तनावपूर्ण शांति बनी हुई थी और किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए थे। अब सवाल यह उठता है कि क्या विधायक की इस तल्खी के बाद प्रशासन नींद से जागेगा? किसानों को उनकी मेहनत का फल समय पर मिलेगा या फिर यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा?