बिहार में एनआईए का बड़ा एक्शन: नौकरी का झांसा देकर युवाओं को कंबोडिया भेजने वाले 'मानव तस्करी और साइबर फ्रॉड' नेटवर्क का भंडाफोड़
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले से अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मंगलवार सुबह-सुबह मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मोतिहारी के फेनहरा थाना क्षेत्र स्थित कालूपाकड़ गांव में तड़के दबिश दी। एनआईए की टीम ने मुख्य आरोपी मोहम्मद कलामुद्दीन के घर को चारों तरफ से घेरकर करीब पांच घंटे तक सघन छापेमारी और गहन पूछताछ की। इस दौरान कंबोडिया भेजे जाने वाले सिंडिकेट से जुड़े कई चौंकाने वाले सबूत हाथ लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब 5 बजे एनआईए की टीम भारी सुरक्षा बलों के साथ कालूपाकड़ गांव पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने कलामुद्दीन के पूरे घर को अपने नियंत्रण में लेकर तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान घर के सभी सदस्यों को एक जगह बैठाकर पूछताछ की गई और घर में मौजूद बैंक पासबुक, पासपोर्ट, कंबोडिया यात्रा से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल जानकारियों को बारीकी से खंगाला गया। मोहम्मद कलामुद्दीन पर आरोप है कि वह भारतीय बेरोजगार युवकों को विदेश में मोटी सैलरी और अच्छी नौकरी का झांसा देकर जाल में फंसाता था और उन्हें कंबोडिया भेजने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट के लिए काम करता था। कंबोडिया पहुँचते ही इन सीधे-सादे भारतीय युवकों के पासपोर्ट छीनकर उन्हें बंधक बना लिया जाता था। इसके बाद वहां अवैध रूप से चल रहे फर्जी कॉल सेंटरों में उनसे जबरन ऑनलाइन डिजिटल ठगी और साइबर अपराध करवाए जाते थे। विरोध करने पर युवकों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था और भारत लौटने की अनुमति भी नहीं दी जाती थी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मोहम्मद कलामुद्दीन का नाम एनआईए की नई दिल्ली स्थित विंग द्वारा दर्ज विशेष केस RC-10/2024/NIA/DLI में प्रमुखता से शामिल है। यह मामला भारत सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और विदेशी साइबर अपराध सिंडिकेट की देशव्यापी जांच से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस गिरोह के तार न केवल बिहार, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों और सीधे कंबोडिया व अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से जुड़े हैं। पांच घंटे की लंबी पूछताछ के बाद एनआईए ने आरोपी मोहम्मद कलामुद्दीन का मोबाइल फोन पूरी तरह जब्त कर लिया है। इस फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उसमें मौजूद डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेन-देन के डिजिटल साक्ष्यों को निकाला जा सके। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन एनआईए ने उसे कानूनी नोटिस थमाकर 13 जुलाई को पटना स्थित विशेष एनआईए कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का कड़ा निर्देश दिया है। पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों विशेषकर कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी कराने के मामलों में अप्रत्याशित बाढ़ आई है। भारत का गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। इसी वैश्विक खतरे को देखते हुए एनआईए अब देश के भीतर छिपे इन एजेंटों और मानव तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। मोतिहारी में हुई इस कार्रवाई के बाद इस सिंडिकेट से जुड़े कई और सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब होने की उम्मीद है।