देश की सुरक्षा में बड़ी सेंध: भारत में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने के लिए आ रही विदेशी फंडिंग,5 राज्यों में ईडी का छापा
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या नागरिकों को भारत में गैरकानूनी तरीके से दाखिल कराने और उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों में बसाने वाले एक संदिग्ध नेटवर्क पर ईडी ने शिकंजा कसा है। इस गिरोह के तार आतंकी फंडिंग से भी जुड़े होने की आशंका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल समेत देश के पांच राज्यों में एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य और भारी मात्रा में अवैध संपत्ति बरामद हुई है।
पश्चिम बंगाल के कलिकापुर इलाके में स्थित 'हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम' में छापेमारी के दौरान ईडी ने 40 लाख रुपये नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए हैं। धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत यूपी के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, महाराष्ट्र के रायगढ़ और पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व मुर्शिदाबाद के 13 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ छापा मारा गया। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, यह नेटवर्क विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत कुछ ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों की आड़ में काम कर रहा था। जांच एजेंसियों को गहरा संदेह है कि इन संस्थाओं के माध्यम से विदेशों से भारी-भरकम रकम छोटे-छोटे हिस्सों में मंगवाई जा रही थी ताकि वह बैंकिंग रडार में न आ सके। संदिग्धों को भारत में अवैध रूप से स्थापित करने और उनके खर्चे चलाने के लिए 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी किस्तों में बिचौलियों के खातों और कथित 'रेंट अकाउंट्स' के माध्यम से पैसा ट्रांसफर किया जा रहा था। ईडी अब इन जटिल लेन-देन से जुड़े सैकड़ों बैंक खातों की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है। ईडी की यह कार्रवाई दरअसल उत्तर प्रदेश आतंकवाद-रोधी दस्ते द्वारा वर्ष 2024 में दर्ज की गई एक एफआईआर पर आधारित है। यूपी-एटीएस की जांच में यह सामने आया था कि देश में एक बेहद संगठित और शातिर गिरोह सक्रिय है, जिसका मुख्य काम रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रास्तों से भारत की सीमा में प्रवेश कराना। भारतीय नागरिकों की तरह दिखने के लिए उनके फर्जी पहचान पत्र (जैसे- पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य भारतीय सरकारी दस्तावेज) तैयार करवाना। इन जाली दस्तावेजों के दम पर उन्हें आजीविका का साधन मुहैया कराना और देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थायी रूप से बसाना। ईडी ने छापों के दौरान मिले कई आपत्तिजनक दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए डेटा के विश्लेषण से इस नेटवर्क के मुख्य सरगनाओं और विदेशों में बैठे उनके आकाओं के नाम सामने आने की पूरी उम्मीद है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले की जांच अब बेहद तेज गति से आगे बढ़ रही है।