टेंडर घोटाले में बड़ी कार्रवाई: सम्राट चौधरी सरकार का करप्शन पर कड़ा प्रहार, जेल में बंद बीएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी निलंबित
पटना। बिहार में भ्रष्टाचार और अफसरों की मनमानी के खिलाफ नीतीश-सम्राट सरकार ने एक बार फिर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। सूबे के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे बिहार प्रशासनिक सेवा (बीएएस) के वरिष्ठ अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में एक कड़ी अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार की इस बड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे और दागी अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
जारी आदेश के मुताबिक, बीएएस अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी फिलहाल राजधानी पटना के बेउर केंद्रीय कारागार में बंद हैं। सरकारी सेवक नियमावली के तहत, जेल जाने की तिथि से ही उनका यह निलंबन प्रभावी माना जाएगा। सस्पेंड किए गए अधिकारी मुमुक्षु कुमार चौधरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर और चौंकाने वाले मामले दर्ज हैं। उन पर सरकारी टेंडरों के आवंटन में भारी रिश्वत लेने, आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक (बेहिसाब) संपत्ति अर्जित करने और अपने रसूखदार सरकारी पद का कथित रूप से दुरुपयोग करने के संगीन आरोप हैं। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब विशेष निगरानी इकाई ने प्राथमिक जांच के बाद उनके विरुद्ध नियमित मुकदमा दर्ज किया। जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी टेंडरों से जुड़े कई ऐसे पुख्ता दस्तावेज मिले हैं, जो सीधे तौर पर इस घोटाले में उनकी संलिप्तता को उजागर करते हैं। चर्चित टेंडर घोटाले की कड़ियां जुड़ने के बाद मामला विशेष अदालत तक पहुंचा। कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों और लंबी सुनवाई के बाद, विशेष अदालत ने गत 11 जून 2026 को मुमुक्षु कुमार चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजने का कड़ा आदेश सुनाया था। अदालत के आदेश के बाद से ही वह पटना की बेउर जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं। चूंकि नियमों के मुताबिक कोई भी सरकारी अधिकारी यदि 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे सेवा से निलंबित करना अनिवार्य होता है; इसी प्रक्रिया के तहत सामान्य प्रशासन विभाग ने सेवा नियमों के अनुरूप उनके निलंबन की फाइल पर मुहर लगा दी। सरकारी आदेश में साफ तौर पर स्पष्ट किया गया है कि यह निलंबन बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के कड़े प्रावधानों के तहत किया गया है। यह कार्रवाई अगली अधिसूचना जारी होने तक पूरी तरह प्रभावी रहेगी। विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि यह कदम केवल उनकी सरकारी सेवा और विभागीय अनुशासन से संबंधित है, जबकि उनके खिलाफ चल रही भ्रष्टाचार की मुख्य जांच और अदालती न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर बिना किसी ढील के जारी रहेगी। बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए यह साफ संदेश दे दिया है कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने को लूटने वाले किसी भी अधिकारी को, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल, विभिन्न जांच एजेंसियां मुमुक्षु चौधरी के अन्य करीबियों और बेनामी संपत्तियों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं।