कैमरा-माइक लेकर पहुंचने वालों पर नजर!पत्रकार कौन, प्रदर्शनकारी कौन?जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के बीच दिल्ली पुलिस ने जारी की एडवाइजरी!
नई दिल्ली।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच पत्रकारों की कवरेज और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस,मीडिया इंफ्लूएंसर ,प्रोटेस्ट एक्टिविस्ट और पत्रकारों के बीच बहस, हिरासत और कथित दुर्व्यवहार से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद अब दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए एडवाइजरी जारी की है। तीन महिला पत्रकारों ने भी पुलिसकर्मियों पर कथित यौन दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं, जिनकी जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।

दिल्ली पुलिस ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रदर्शन की कवरेज के दौरान पत्रकार अपने साथ संबंधित संस्थान का वैध पहचान-पत्र अथवा PIB/DIP मान्यता कार्ड रखें और उसे पूरे समय स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें, ताकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी उनकी पहचान पत्रकार के तौर पर कर सकें। पुलिस ने पत्रकारों से यह भी कहा है कि वे पुलिस के कामकाज अथवा कानून-व्यवस्था संभाल रहे जवानों की आवाजाही में बाधा न डालें।

एडवाइजरी में तनावपूर्ण स्थिति के दौरान पत्रकारों को पुलिस से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा कवरेज के दौरान ऐसी जगह खड़े होने की सलाह दी गई है, जिससे वे प्रदर्शनकारियों से अलग और स्पष्ट रूप से पहचाने जा सकें। दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्ट में पत्रकारों को पुलिसकर्मियों के बेहद करीब जाकर माइक लगाने से भी बचने का संदेश दिया है।

इस एडवाइजरी के पीछे एक बड़ी वजह प्रदर्शन स्थल पर पत्रकारों की पहचान को लेकर पैदा हुई स्थिति भी मानी जा रही है। जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शनों से सामने आए कई सोशल मीडिया वीडियो में ऐसे लोग भी नजर आए, जो खुद को पत्रकार या स्वतंत्र पत्रकार बताकर पुलिसकर्मियों से तीखी बहस करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की ओर से यह चिंता सामने आई है कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, ब्लॉगर अथवा अन्य सोशल मीडिया यूजर्स यदि पत्रकार की पहचान के साथ मौके पर सक्रिय हों और उनकी पहचान स्पष्ट न हो, तो वास्तविक पत्रकारों और अन्य लोगों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति और जटिल होने की आशंका रहती है।
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने पत्रकारों के लिए पहचान-पत्र स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने और पुलिस से सुरक्षित दूरी रखने की सलाह का समर्थन किया, जबकि कई सोशल मीडिया यूजर्स ने पुलिस की इस पहल पर तीखी प्रतिक्रिया दी। आलोचकों ने सवाल उठाया कि पत्रकारों के लिए नियम बताए जाने के साथ पुलिसकर्मियों की पहचान और जवाबदेही को लेकर भी समान रूप से स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
दरअसल, हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों के नेमप्लेट/पहचान प्रदर्शित नहीं करने को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक जंतर-मंतर पर ड्यूटी कर रहे कुछ पुलिसकर्मी स्पष्ट नेम टैग के बिना दिखाई दिए, जिस पर सवाल उठे। पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि विरोध प्रदर्शनों में तैनात कुछ कर्मियों की पहचान जानबूझकर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की गई थी, ताकि सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत पहचान और परिवारों को निशाना बनाए जाने की आशंका से बचा जा सके।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन ड्यूटी पर तैनात अग्रिम पंक्ति के पुलिसकर्मियों को बॉडी-वॉर्न कैमरे भी उपलब्ध कराए हैं। पुलिस के अनुसार इन कैमरों से प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत और घटनाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे किसी विवाद या आरोप की स्थिति में घटनाक्रम की जांच में मदद मिल सकेगी।
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