जियो नैनीताल पुलिस : चरस तस्करी पर कार्रवाई एसटीएफ की, प्रेस नोट में वाहवाही एसएसपी नैनीताल की!
हल्द्वानी। नैनीताल जनपद के हल्द्वानी क्षेत्र में नशे का काला कारोबार लगातार अपने पैर पसारता जा रहा है। आए दिन नशा तस्करी के नए-नए मामले सामने आ रहे हैं और पुलिस के दावों के बावजूद यह कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार 10 मई को दमुवाढूंगा क्षेत्र में करीब 10 लाख रुपये कीमत की 5 किलो 2 ग्राम अवैध चरस बरामद होने और दो तस्करों की गिरफ्तारी के बाद जहां एक ओर पुलिस अपनी पीठ थपथपाती नजर आई, वहीं दूसरी ओर इस कार्रवाई ने नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब दमुवाढूंगा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में लंबे समय से बुटीक की आड़ में चरस तस्करी का खेल चल रहा था, तो क्या इसकी भनक स्थानीय पुलिस को नहीं थी? यदि थी, तो फिर कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? इस सवाल को और मजबूती इसलिए मिल रही है क्योंकि इस मामले में एसटीएफ देहरादून और नैनीताल पुलिस मीडिया सेल की ओर से अलग-अलग प्रेस नोट जारी किए गए, जिनकी भाषा और दावों में स्पष्ट अंतर दिखाई दिया। देहरादून स्थित एसटीएफ मुख्यालय से जारी प्रेस नोट में साफ तौर पर कहा गया कि उत्तराखंड एसटीएफ की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स कुमाऊं यूनिट ने तकनीकी और मैनुअल इनपुट विकसित कर स्थानीय पुलिस को साथ लेकर कार्रवाई की और सफलता हासिल की। वहीं नैनीताल पुलिस मीडिया सेल द्वारा जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि यह सफलता एसएसपी नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टीसी के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत काठगोदाम पुलिस और एएनटीएफ/एसटीएफ की संयुक्त उपलब्धि है। दोनों प्रेस नोटों के बीच इस अंतर ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या स्थानीय पुलिस सिर्फ कार्रवाई के बाद श्रेय लेने की होड़ में शामिल हो गई?
बता दें कि रविवार को दमुवाढूंगा क्षेत्र के देवखड़ी स्थित सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान के सामने संचालित ‘डी फैशन बुटीक’ नामक दुकान पर छापेमारी की गई थी। कार्रवाई के दौरान दुकान के भीतर से भारी मात्रा में अवैध चरस बरामद हुई। मौके से 50 वर्षीय प्रवीण आर्या निवासी देवखड़ी दमुवाढूंगा और 44 वर्षीय बलवंत सिंह निवासी बागेश्वर को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह चरस बागेश्वर क्षेत्र से लाई गई थी और हल्द्वानी समेत आसपास के इलाकों में सप्लाई की जानी थी। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह सिर्फ दो लोगों का काम नहीं बल्कि एक संगठित सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा है, जिसकी जड़ें कई जिलों तक फैली हो सकती हैं।
अब बड़ा सवाल यह भी है कि जब हल्द्वानी में पिछले कुछ वर्षों में नशे के मामलों में तेजी आई है, तो स्थानीय पुलिस की नियमित निगरानी और मुखबिर तंत्र आखिर कितना प्रभावी है? क्या नशा तस्कर पुलिस की आंखों में धूल झोंककर खुलेआम अपना कारोबार चला रहे हैं? हालांकि एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने कहा है कि नैनीताल पुलिस जनपद को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि जब कार्रवाई का सुराग एसटीएफ के तकनीकी इनपुट से मिले और स्थानीय पुलिस को बाद में साथ लिया जाए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। लेकिन इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि हल्द्वानी में नशे के बढ़ते कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि स्थानीय पुलिसिंग की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।