सीएम की जनसभा में गूंजा 'मीट प्रोसेसिंग यूनिट' का मुद्दा: हाथों में पोस्टर ले पहुंचे ग्रामीण,सम्राट चौधरी ने मंच से ही दिए जांच के कड़े निर्देश
फारबिसगंज। अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत हरिपुर पंचायत सरकार भवन परिसर में आयोजित 'जन सहयोग शिविर' और विशाल जनसभा के दौरान एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा गरमा गया। सिमराहा थाना क्षेत्र में संचालित और प्रस्तावित मीट प्रोसेसिंग इकाइयों के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय नागरिक अपने हाथों में विरोध के पोस्टर और बैनर लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंच के सामने पहुंच गए और सीधे सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया।
जनता की इस पुरजोर मांग और भारी जनभावना को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेहद संवेदनशील रुख अपनाया। उन्होंने मंच से ही अररिया के जिला पदाधिकारी (डीएम) विनोद कुमार दुहन को इस पूरे मामले की गहनता से जांच करने के कड़े निर्देश जारी किए। सभा स्थल पर पहुंचे आंदोलनकारी ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घनी आबादी के बिल्कुल समीप इन मीट प्रोसेसिंग इकाइयों के संचालन से पूरे इलाके का पर्यावरण, स्थानीय जल स्रोत और जनस्वास्थ्य गंभीर खतरे में हैं। ग्रामीणों का कहना था कि वे लंबे समय से इस प्रदूषण और इसके कारण फैलने वाली बीमारियों के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के सामने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और स्थानीय नागरिकों की आपत्तियों का विधिक निस्तारण हो। जनसभा के दौरान अररिया के स्थानीय सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने भी इस जन-सरोकार के मुद्दे को बेहद मजबूती से मंच पर रखा। उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय नागरिकों की शिकायतों और उनके स्वास्थ्य से जुड़े इस विषय को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सांसद ने बताया कि इन इकाइयों से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण आसपास के गांवों में रहना दुश्वार हो गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस जनहित के मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर उचित और स्थायी कानूनी कार्रवाई करने का विशेष आग्रह किया। सांसद की अपील और जनता के भारी विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऑन-स्पॉट (तुरंत) एक्शन लिया। उन्होंने मंच से ही जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को स्पष्ट शब्दों में हिदायत देते हुए कहा यदि क्षेत्र में कोई भी मीट प्रोसेसिंग इकाई अवैध रूप से या बिना मानकों के संचालित हो रही है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल प्रभाव से दंडात्मक कार्रवाई की जाए। पर्यावरण प्रदूषण, जल स्रोतों पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों की जांच संबंधित विभागों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर कराई जाए। यदि जांच में ग्रामीणों की शिकायतें सही पाई गईं, तो ऐसी इकाइयों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े और स्पष्ट निर्देश के बाद सभा में मौजूद हजारों ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों ने तालियां बजाकर सरकार के फैसले का स्वागत किया। वर्षों से इस समस्या से जूझ रहे स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहली बार है जब सूबे के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में इस मुद्दे पर इतनी गंभीरता और सार्वजनिक रूप से चर्चा हुई है। जिला प्रशासन को मिले सीधे आदेश के बाद अब लोगों में यह उम्मीद जगी है कि इस प्रदूषित और विवादित मामले का जल्द ही स्थायी समाधान निकलेगा।